शुक्रवार, 30 जुलाई, 2004 को 09:29 GMT तक के समाचार
लंबे विवाद और चर्चा के बाद विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) ने एक संशोधित मसौदा पेश किया है, जो विशेष रुप से कृषि से जुड़े मामलों पर है.
इस प्रस्तावित मसौदे को सभी सदस्य 147 देशों के बीच बाँट दिया गया है और इसके लिए शुक्रवार की मध्यरात्रि तक का समय दिया गया है.
जिनेवा में चल रही डब्लूटीओ बैठक का शुक्रवार को अंतिम दिन है.
समाचार एजेंसी रॉयटर के अनुसार डब्लूटीओ के प्रमुख सुपचाई पानीचपाक ने इस नए प्रस्ताव के बारे में कहा है कि यह 'मान जाओ या छोड़ दो' जैसा है.
समाचार एजेंसियों का कहना है कि नया प्रस्ताव अमीर देशों और ग़रीब देशों की कृषि संबंधित माँगों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है.
दो गुट
डब्लूटीओ कृषि मसले पर दो गुटों में बँट गया है, एक ओर तो वो विकसित देश हैं जो किसानों को और अधिक सब्सिडी देना चाहते हैं और विकासशील देशों के बाज़ार में और अधिक खुलापन चाहते हैं.
दूसरी ओर विकासशील देश इसका विरोध कर रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि डब्लूटीओ में पारदर्शिता की कमी है.
नए मसौदे में संवेदनशील उत्पादों पर आयात सब्सिडी के प्रावधानों को और कड़ा करने का प्रस्ताव किया गया है जिससे यूरोपीय देश, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश नाराज़ हो सकते हैं.
लेकिन औद्योगिक देशों की माँग के अनुसार माइक्रोचिप से लेकर खिलौनों तक सभी औद्योगिक उत्पादों में लगी रोक को कम करने के प्रस्ताव में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
उल्लेखनीय है कि कृषि और कृषि उत्पादों के मसले पर ही कैनकुन में डब्लूटीओ की बैठक बिना निर्णय ख़त्म हो गई थी.
डब्लूटीओ के अधिकारी कह रहे हैं कि यदि इस बार कोई ठोस फ़ैसला नहीं हो सका तो आर्थिक उदारीकरण की प्रक्रिया कई वर्षों के लिए रुक जाएगी.