सोमवार, 28 जून, 2004 को 13:21 GMT तक के समाचार
इराक़ में सत्ता हस्तांतरण के साथ ही सवाल पूछे जा रहे हैं कि तेल और अन्य स्रोतों से हुई आमदनी कहाँ गई.
जिस राशि के बारे में सबसे बड़ा सवाल खड़ा हुआ है वह पिछले साल इराक़ युद्ध समाप्त होने के बाद तेल और अन्य स्रोतों से आए 20 अरब डॉलर की है.
अमरीकी नेतृत्व वाले गठबंधन के अंतरिम प्रशासन को संयुक्त राष्ट्र ने इराक़ की अर्थव्यवस्था संभालने की ज़िम्मेदारी सौंपी थी.
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि अब गठबंधन को इराक़ विकास कोष की राशि का हिसाब देना चाहिए और बताना चाहिए कि इसका उपयोग इराक़ के हित में ही हुआ.
सभी स्रोतों से आने वाली राशि को केंद्रीय कोष में आना था.
हिसाब-किताब नहीं
क्रिश्चियन एड और लिबरल डेमोक्रेट दोनों ही गठबंधन प्रशासन की इस बात के लिए निंदा कर रहे हैं कि पिछले साल अप्रैल तक जो भी जमा-ख़र्च हुआ उसका कोई हिसाब-किताब नहीं रखा गया.
क्रिश्चियन एड का कहना है कि जो हिसाब-किताब गठबंधन प्रशासन ने दिया है वह 'बिल्कुल अपर्याप्त' है.
ग़ौरतलब है कि 29 मई को गठबंधन ने कहा था कि उसने 19.4 अरब डॉलर की राशि विकास कोष में जमा कराई थी और उसका उपयोग गेहूँ ख़रीदने, बिजली, तेल के लिए ढाँचे के निर्माण और सेना के लिए उपकरण की ख़रीदारी के लिए किया गया.
गठबंधन प्रशासन का कहना है कि तेल की बिक्री से 10 अरब डॉलर की आय हुई.
जबकि लिबरल डेमोक्रेट्स का कहना है कि तेल से हुई आय और विकास कोष में जमा की गई राशि में 3.7 अरब डॉलर का फ़र्क है.
दोनों संस्थाओं ने अपने आकलनों में तेल से होने वाली आय का अलग-अलग हिसाब बताया है जबकि गठबंधन प्रशासन का हिसाब कुछ और कह रहा है.
दोनों ही संस्थाओं का कहना है कि तेल से अरबों डॉलर की आय होती है लेकिन यह पता नहीं है कि यह राशि कहाँ ख़र्च की गई.
आर्थिक चुनौतियाँ
दूसरी ओर बीबीसी संवाददाता एँड्र्यू वॉकर का कहना है कि इराक़ में सुरक्षा की जो स्थिति है उसकी वजह से अर्थव्यवस्था को सुधारना एक बड़ी चुनौती रहेगी.
उनका कहना है कि पिछले साल इराक़ की अर्थव्यवस्था में बड़ा सुधार हुआ है.
लंदन की एक संस्था का आकलन है कि पिछले साल इराक़ का आर्थिक विकास 55 प्रतिशत हुआ है.
हालाँकि इराक़ के पास दुनिया का दूसरा बड़ा तेल भंडार है और नई सरकार को इसका बड़ा सहारा होगा लेकिन सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति से बड़ी आर्थिक दिक्कत पैदा हो सकती है.
हाल ही में इराक़ी तेल पाइपलाइनों पर हुए हमलों से इराक़ के तेल निर्यात पर बड़ा असर पड़ा है, और आने वाले दिनों में लंबी पाइप लाइनों की सुरक्षा काफ़ी कठिन काम होगा.
उम्मीद की जा रही थी कि इराक़ के पुनर्निर्माण के काम में बड़ी संख्या में रोज़गार के अवसर पैदा होंगे लेकिन सुरक्षा की स्थिति ने इसमें भी बाधा पहुँचाई है.
उधर इराक़ पर अभी 120 अरब डॉलर का कर्ज़ है. इसे भी अदा की ज़रुरत होगी.
हालाँकि अमरीका चाहता है कि कर्ज़ देने वाले देश 90 प्रतिशत कर्ज़ माफ़ कर दें लेकिन कुछ देशों की राशि अमरीकी कर्ज़ की राशि से बड़ी है और वे इतनी छूट देने को तैयार नहीं हैं.