ब्रितानी विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ ने कहा है कि उनकी सरकार आउटसोर्सिंग के कारण रोज़गार के अवसरों में कमी से चिंतित है.
लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि ब्रिटेन को निवेश के बदले पैटर्न का फ़ायदा भी मिल रहा है.
बंगलोर में भारतीय उद्योग जगत के प्रतिनिधियों की एक बैठक में उन्होंने कहा, "हम अपने यहाँ के कामों की भारत में आउटसोर्सिंग करा के कोई उपकार नहीं कर रहे. हम अपने फ़ायदे के लिए ही ऐसा कर रहे हैं. ये अलग बात है कि आपको भी इसका फ़ायदा मिल रहा है."
स्ट्रॉ ने कहा कि ब्रिटेन अपने यहाँ संरक्षणवाद को बढ़ावा नहीं दे रहा.
ब्रितानी विदेश मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय निवेश के नए पैटर्न के असर से उनकी सरकार चिंतित है क्योंकि इससे नौकरियाँ कम हुई हैं.
दोतरफ़ा असर
स्ट्रॉ ने कहा कि इसका कुछ सकारात्मक असर भी हुआ है और अकेले 2002 में ब्रिटेन के वित्तीय क्षेत्र में रोज़गार के पाँच हज़ार नए अवसर पैदा हुए.
स्ट्रॉ ने कहा कि भारत ब्रिटेन में आठवाँ सबसे बड़ा निवेशक है.
उन्होंने उम्मीद व्यक्त की कि भारत बैंकिंग और क़ानूनी सेवाओं के क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों को ब्रिटेन की कंपनियों के लिए खोल सकेगा.
उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन की कई कंपनियों ने कॉल सेंटर और पूछताछ सेवाओं वाले अपने काम भारत स्थानांतरित कर दिए हैं, और ब्रितानी श्रमिक संगठनों ने इसका विरोध किया है.