भारतीय प्रबंध संस्थान यानी आईआईएम के छात्रों और अध्यापकों ने संस्था की फ़ीस घटाए जाने की आलोचना की है.
उनका कहना है कि इससे यहाँ की पढ़ाई का स्तर प्रभावित होगा.
भारत सरकार ने पूरे देश में आईआईएम के संस्थानों में पढ़ाई की फ़ीस 80 प्रतिशत घटाने की घोषणा की है.
सरकार का कहना है कि इस क़दम से कम आय वर्गों के लोग इन संस्थानों में पढ़ सकेंगे.
लेकिन संस्थान के शिक्षकों और छात्रों ने इस फ़ैसले को चुनाव से प्रेरित क़दम बताया है.
आपत्तियाँ
आईआईएम अहमदाबाद के दूसरे वर्ष के छात्र सैकत सेनगुप्ता का कहना है कि पूरे देश में छात्रों के लिए आईआईएम की फ़ीस कोई बड़ा मुद्दा कभी नहीं रहा.
सैकत ने कहा,"देश के सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों में आईआईएम के छात्रों को पढ़ाई के लिए कर्ज़ देने के लिए होड़ लगी रहती है".
एक दूसरे छात्र अनुराग केडिया ने कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्री मुरली मनोहर जोशी ऐसी समस्या के हल की बात कर रहे हैं जो है ही नहीं.
अनुराग ने कहा,"ये एक चुनावी हथकंडा है और सरकार बस ये प्रचार करना चाहती है कि अलग-अलग दर्जों के लोग भी ऐसे संस्थानों में पढ़ाई कर सकते हैं".
आईआईएम अहमदाबाद के एक अध्यापक अनिल गुप्ता ने कहा,"आप मुझे एक भी छात्र का नाम बता दीजिए जो यहाँ अपनी पढ़ाई का ख़र्च नहीं उठा पा रहा हो और मैं आपकी बात मान लूँगा".
प्रेक्षकों की राय है कि आईआईएम में चुनाव के समय तक वर्तमान फ़ीस ही ली जाती रहेगी और नई सरकार के आने पर फिर उनके सामने इस मुद्दे को उठाया जाएगा.