इटली में कॉफ़ी के एक कप की कीमत का मामला अदालत तक जा पहुँचा, और उपभोक्ता संगठनों को उम्मीद है देश के लाखों कॉफ़ी प्रेमियों को हर्जाना मिल सकता है.
ये कोई कहने वाली बात नहीं कि इटली में लोग कॉफ़ी को लेकर बड़े संवेदनशील होते हैं.
अदालत का ताज़ा फ़ैसला जनवरी 2002 के एक मामले में आया है.
जब इटली ने यूरोपीय संघ की मुद्रा यूरो को अपनाया तो कई कैफ़े और बार प्रबंधकों ने अपने यहाँ एक कप कॉफ़ी की कीमत 'राउंड फ़िगर' में एक यूरो कर दी.
राजधानी रोम के निकट एक बार को कैपाचिनो कॉफ़ी एक यूरो में बेचने के लिए प्रति कप 23 सेंट हर्जाना देने का आदेश दिया गया है.
उपभोक्ता संगठन कोडाकॉन्स ने फ़ैसले के बारे में कहा, "कैपाचिनो ने बदला चुका लिया है. जज ने एक महत्वपूर्ण सिद्धांत सामने रखा है....अब उन लाखों लोगों को हर्जाना मिल सकेगा जिन्होंने रसीद सँभाल कर रखी हो."
अपील
जिस बार को हर्जाना देने का आदेश मिला है, उसकी मालिक ने इसके ख़िलाफ़ अपील करने का फ़ैसला किया है.
उसने माना कि हिसाब-किताब में आसानी के लिए ही कॉफ़ी के एक कप की कीमत एक यूरो की गई थी.
यूरो मुद्रा के प्रचलन से पहले उस बार में कॉफ़ी का एक कप 1500 लीरा यानी 77 सेंट में आता था.
यूरो के प्रचलन के बाद यूरोपीय संघ के अधिकतर देशों में मूल्यों को निकटतम राउंड फ़िगर में बदला गया.
हालाँकि फ़्रांस में अधिकारियों ने सख़्ती से क़ानून लागू किया और वहाँ ऐसा नहीं हो पाया.
यूरोपीय संघ के देशों में उपभोक्ता संगठनों ने दुकानदारों के राउंड फ़िगर प्रेम को 'यूरोफ़्लेशन' का नाम दिया और कई शहरों में ऐसा करने वाले दुकानदारों का बहिष्कार किया गया.
अब भी जारी विवाद में पिछले महीने ही इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी ने हस्तक्षेप किया.
उन्होंने उपभोक्ताओं को सलाह दी कि वे यूरो को लेकर फैलाए गए भ्रम से बचने के लिए ख़रीदारी से पहले कई दुकानों के चक्कर लगाएँ.