एशियाई बाज़ारों में सन् 2004 नई ऊँचाई लेकर आया है और लगभग सभी एशियाई बाज़ारों में तेज़ी का रुख़ जारी है.
कई शेयर बाज़ारों ने तो रिकॉर्ड स्तर हासिल किया है.
हॉगकॉग के हांग सेंग शेयर बाज़ार ने 30 महीनों के सबसे ऊँचे स्तर को छुआ.
मुंबई शेयर बाज़ार भी शुक्रवार को 6026 की ऊँचाई तक जा पहुँचा.
चार साल में पहली बार सेंसेक्स 6000 के आँकड़े से ऊपर बंद हुआ है.
इसी तरह श्रीलंका के शेयर बाज़ार ने अच्छी बढ़त हासिल की.
जापान के निक्की ने भी चार साल बाद ऊँचाई का दौर आया है.
एशियाई बाज़ारों में उछाल की अंतरराष्ट्रीय वजह के साथ-साथ स्थानीय कारण भी थे.
साल के अंत में कई पश्चिमी देशों में चरमपंथी हमलों की आशंका व्यक्त की जा रही थी.
लेकिन ऐसा नहीं हुआ और इसने एशियाई बाज़ारों को बढ़त का मौक़ा मिला.
हॉगकॉग के शेयर बाज़ार में तेज़ी की वजह चीन की अर्थव्यवस्था में मज़बूती के कारण मानी जा रही है.
कोरिया के बाज़ार में तेज़ी का रुख़ कार निर्माताओं को अच्छे मुनाफ़ा को माना जा रहा है.
ताइवान में सूचना तकनीक उत्पादों के निर्यात में बढोत्तरी की संभावना से बाज़ार में तेज़ी बनी हुई है.
भारत में अर्थव्यवस्था मज़बूत होने और कंपनियों के अच्छे वित्तीय नतीज़ों के कारण तेज़ी मानी जा रही है.
उल्लेखनीय बात ये है कि रुपये में मज़बूती के बावजूद भारत का निर्यात 13 प्रतिशत की दर से बढ़ा है और भारत का विदेशी मुद्रा भंडार पहली बार 100 अरब डॉलर से ऊपर पहुँच चुका है.