इराक़ में सद्दाम हुसैन की सरकार गिरने के बाद उन देशों के सामने एक मुश्किल खड़ी हो गई जिन्होंने सद्दाम हुसैन सरकार के साथ तेल और अन्य व्यापार समझौते किए थे.
अमरीका की नियुक्त की हुई अंतरिम शासकीय परिषद अब इस मसले को हल करने की कोशिश कर रही है इसी प्रयास के तहत परिषद का एक प्रतिनिधिमंडल रूस की यात्रा कर रहा है.
ये प्रतिनिधिमंडल रूस से उन ठेकों की स्थिति पर विचार करने गया है जिन पर सद्दाम हुसैन सरकार के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे.
ग़ौरतलब है कि रूस की बहुत सी कंपनियों ने इराक़ से साथ तेल और निर्माण के क्षेत्रों में कई बड़े ठेके लिए थे जिनपर अमरीकी युद्द के चलते पानी फिर गया.
हालाँकि रूस ने साफ़ संकेत दिए हैं कि अगर इराक़ में अमरीकी प्रशासन उन ठेकों को बरक़रार रखने को तैयार है तो रूस भी इस बारे में विचार कर सकता है और यह भी कि इराक़ के सिर से रूस को लौटाने वाले क़र्ज़ का बोझ कम किया जा सके.
इराक़ पर रूस का क़रीब आठ करोड़ अमरीकी डॉलर के बराबर क़र्ज़ है.
रूस शुरू से ही इराक़ पर हमले के विरोध में था इसलिए उसे इराक़ में होने वाले पुनर्निर्माण के कामों के ठेकों की बोली लगाने से भी अब तक दूर रखा गया था.
लेकिन मॉस्को में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि रूस अब अपनी स्थिति को बदलने की पूरी कोशिश करेगा.