एक और ब्रितानी कंपनी नरिच यूनियन ने बड़ी संख्या में अपनी नौकरियों को भारत भेजने का फ़ैसला किया है.
नरिच यूनियन ने पहले ही बंगलौर और दिल्ली में अपने दफ़्तर खोल रखे हैं जिसमें 1200 लोग काम कर रहे हैं.
कंपनी का कहना है कि वर्ष 2004 के अंत तक उसकी लगभग 3750 नौकरियाँ भारत में होंगी.
इसके अलावा कंपनी ने बड़े पैमाने पर छँटनी करने की घोषणा की है, बीमा क्षेत्र के कर्मचारी यूनियन का कहना है कि कम से कम 500 नौकरियाँ खत्म की जा रही है.
पाँच सौ के इस आँकड़े में वे नौकरियाँ शामिल नहीं हैं जो भारत जा रही हैं.
कर्मचारी संगठन ने कंपनी के निर्णय की काफ़ी आलोचना की है और कहा है कि वे इसे रोकने के लिए संघर्ष करेंगे.
ट्रेड यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगले पाँच सालों में ब्रिटेन के वित्तीय क्षेत्र से लगभग दो लाख नौकरियाँ दूसरे देशों में चली जाएँगी.
इनमें से अधिकतर नौकरियाँ भारत जा रही हैं क्योंक वहाँ अँगरेज़ी जानने वाले पेशेवर लोग अपेक्षाकृत कम वेतन पर काम करने के लिए मिल जाते हैं.
भारत में 3,700 नौकरियाँ
कंपनी का कहना है कि सिर्फ़ 12 लोगों को अनिवार्य रूप से हटाया गया है वो भी उस समय जब साल की शुरुआत में 1,250 नौकरियाँ भारत भेजी गई थीं.
कर्मचारी यूनियन के राष्ट्रीय सचिव डेविड फ़्लेमिंग ने कहा," ये घोषणा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. ये अनैतिक फ़ायदों पर आधारित है और इससे ये साफ़ झलक रहा है कि कंपनी अपने ब्रिटेन के कर्मचारियों और ग्राहकों को नज़रअंदाज़ कर रही है."
यूनियन का कहना है कि कंपनी के इस निर्णय से बाज़ार में नौकरियाँ ढ़ूँढ़ने वाले युवाओं में बेहद असुरक्षा की भावना आ गई है.