भारत और यूरोपीय संघ की व्यवसायिक सम्मेलन में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर दोगुना करने पर सहमति हो गई है.
फ़िहाल द्विपक्षीय व्यापार 32 अरब डॉलर है और इस सन 2008 तक 60 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा गया है.
लेकिन यूरोपीय संघ के विदेश मामलों के आयुक्त क्रिस पैटन ने कहा कि भारत में आर्थिक सुधारों की गति बढ़ाई जानी चाहिए.
उनका कहना था, "भारत में अफ़सरशाही, मूलभूत ढ़ाँचे और श्रम क़ानूनों की समस्याओं के चलते वहाँ व्यवसाय करना अब भी मुश्किल है."
क्रिस पैटन का कहना था कि यदि ये अड़चनें चलती रहीं तो इनसे यूरोपीय कंपनियों और भारतीय उद्योग दोनो का ही नुकसान होगा.
इस पर भारतीय विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा का कहना था, "माहौल बदल गया है और अभी और बदलेगा. भारत की पुरानी तस्वीर अपने दिमाग से निकाल दें. भारत में बहुत कुछ हो रहा है और मौका हाथ से मत जाने दें."
लेकिन क्रिस पैटन की आर्थिक सुधारों की बात पर सिन्हा ने कहा कि भारत को अपने लोकतंत्र की स्थित और हितों को भी ध्यान में रखना होगा.
उन्होंने कहा कि भारत ने कई वस्तुओं पर कर घटाकर व्यापार बाधाओं को दूर करने की कोशिश की है.