अमरीका ने चीन में बने कपड़ों के आयात को सीमित किया है और चीन में इसको लेकर भारी रोष है.
साथ ही ये भी ख़बर है कि चीन भी पलटकर इसका जवाब देने की तैयारी में जुट गया है.
चीन ने कहा है कि वो अमरीकी रूख का खुल कर विरोध करता है और इस मुद्दे पर विश्व व्यापार संगठन से अपील करने की तैयारी भी कर रहा है.
ये समाचार अंतरर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की उस घोषणा के बाद मिला जिसमें ये कहा गया है कि चीनी मुद्रा का मूल्या कम नहीं हुआ है.
दरअसल अमरीका का ये दावा था कि चीन की मुद्रा सस्ती होती जा रही है.
अंतरर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने चीन की अर्थव्यवस्था की वार्षिक समीक्षा में कहा," चीन की मुद्रा के अंतरर्राष्ट्रीय बाज़ार में गिरने के एक तो ठोस संकेत नहीं मिले हैं और यदि ऐसा है भी तो इससे विश्व व्यापार के संतुलन में कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा."
बुश प्रशासन के कई सदस्यों का मानना है कि चीन अपनी मुद्रा 'युआन ' को जानबूझ कर कम मूल्य का दिखा रहा है ताकि अपना निर्यात बढ़ा सके.
कारोबार
इस नए अमरीकी फ़ैसले का मक़सद चीन के वार्षिक निर्यात को 7.5 प्रतिशत तक सीमित रखना है.
ख़ासकर ड्रेसिंग गाउन और महिलाओं के वस्त्रों जैसे ब्रा और पैंटी के निर्यात को निशाना बनाया गया है.
पिछले 14 महीनों में चीन के वस्त्र उत्पादों के निर्यात में अभूतपूर्व बढ़त हुई है.
अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए चीनी सरकार की सब्सिडी की नीति ज़िम्मेदार है.
बाज़ार के विश्लेषकों का मानना है कि ये क़दम अमरीका ने ग़लत समय में उठाया है.
चीन से कपड़ों के आयात पर अमरीका के प्रतिबंध का सीधा असर बाज़ार पर पड़ने के संकेत मिले हैं.
इससे यूरो का मूल्य इसके इतिहास में सबसे अधिक बढ़ गया है.
एशिया में एक यूरो 1.19 अमरीकी डॉलर का हो गया और साथ ही येन भी काफ़ी मज़बूत हो गया.