जापान ने घोषणा की है कि यूरोपीय संघ के साथ वो भी अमरीकी उत्पादों पर जवाबी शुल्क लगाएगा.
जापान ने कहा है कि एक महीने के अंदर अमरीकी उत्पादों पर शुल्क लगा दिया जाएगा.
इसके पहले अमरीका ने विश्व व्यापार संगठन यानी डब्ल्यूटीओ की इस्पात पर व्यवस्था पर आपत्ति की थी जिसमें कहा गया था कि अमरीका ने इस्पात पर आयात शुल्क लगाकर अंतरराष्ट्रीय नियमों को तोड़ा है.
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता स्कॉट मैक्लीलन ने कहा कि आयात शुल्क अमरीकी इस्पात उद्योग को व्यवस्थित करने के लिए लगाया गया था.
उनका कहना था कि ये शुल्क डब्ल्यूटीओ के नियमों के अनुरूप हैं.
लेकिन डब्ल्यूटीओ की व्यवस्था का चीन, ब्राज़ील और दक्षिण कोरिया ने स्वागत किया है.
उनका कहना है कि अमरीका के पास आयात शुल्क को बिना किसी देरी के हटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.
यूरोपीय संघ ने पहले ही चेतावनी दे दी है कि यदि ये शुल्क नहीं हटाया जाता है तो वो अमरीकी उत्पादों पर शुल्क लगा देगा.
लेकिन अमरीकी संसद में आयात शुल्क के समर्थकों ने डब्ल्यूटीओ की आलोचना की है.
इस साल मई में डब्ल्यूटीओ ने अमरीका के इस आयात शुल्क को ग़ैरक़ानूनी घोषित कर दिया था.
यूरोपीय संघ ने दो अरब डॉलर के सामान की एक सूची बनाई है जिसे अमरीका से आयात किया जाता है.
विवाद
यूरोप की इस्पात बनानेवाली कंपनियों मान रही हैं कि अमरीका के आयात शुल्क बढ़ाने से उनके लिए अमरीका जैसा आकर्षक बाज़ार बंद हो रहा है.
जनवरी, 2002 में अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इस्पात के आयात पर 30 प्रतिशत शुल्क लगाने का निर्णय किया था.
यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और रूस ने भी अमरीकी राष्ट्रपति बुश को इस्पात के आयात पर दंडात्मक शुल्क लगाने की आलोचना की थी.
अमरीकी राष्ट्रपति बुश का कहना था कि उनका उद्देश्य अमरीका के बीमार इस्पात उद्योग को बचाना है.
पिछले कुछ साल में अमरीका अनगिनत इस्पात कंपनियों का दीवाला पिटने से हज़ारों अमरीकी बेरोज़गार हो चुके हैं.
उनका तर्क है कि अगर इस उद्योग को बचाने के उपाय नहीं किए गए, तो अमरीका का इस्पात उद्योग तबाह हो सकता है.