ब्रिटेन की प्रमुख दवा कंपनी ग्लैक्सो स्मिथक्लाइन ने भारत की सबसे बड़ा दवा निर्माता कंपनी रैनबैक्सी के साथ दवाएँ विकसित करने का समझौता किया है.
ये किसी विदेशी और भारतीय कंपनी का अपनी तरह का पहला समझौता है.
माना जा रहा है कि जैसे ब्रिटेन से कॉल सेंटर का कारोबार भारत जा रहा है, उसी तरह दवा विकसित करने के कारोबार के बाहर जाने की ये शुरुआत है.
इस समझौते से ग्लैक्सो कम लागत में दवाएँ विकसित कर सकेगी.
रैनबैक्सी का जैनरिक दवाओं के कारोबार में भारी दखल है.
लेकिन 2005 से पेटेंट क़ानून लागू हो जाने के बाद रैनबैक्सी को दवा अनुसंधान पर अधिक ध्यान देना होगा.
नए समझौते के तहत रैनबैक्सी दवाएँ तैयार कर प्रारंभिक परीक्षण भारत में करेगी जबकि ग्लैक्सो स्मिथक्लाइन दवा के बाद के विकास पर ध्यान देगी.
इस समझौते के तहत रैनबैक्सी जो दवाएँ विकसित करेगी,ग्लैक्सो स्मिथक्लाइन के पास उसके भारत के बाहर व्यापारिक अधिकार होंगे.
लेकिन दोनों में से किसी भी कंपनी ने इस समझौते का वित्तीय ब्यौरा नहीं दिया है.