रिलायंस उद्योग समूह के मुकेश और अनिल अंबानी भारत के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं. अज़ीम प्रेमजी इस सूची में सबसे ऊपर थे लेकिन अब वे दूसरे नंबर पर चले गए हैं.
बिज़नेस स्टैंडर्ड अखबार के एक सर्वेक्षण में उनकी संपत्ति 23, 588 करोड़ रुपए आंकी गई है.
एक सर्वेक्षण के अनुसार दिसंबर 2002 से अगस्त 2003 के बीच रिलायंस की संपत्ति में बढ़ोत्तरी हुई है.
इससे पहले कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर कंपनी विप्रो के चेयरमैन अज़ीम प्रेमजी भारत के सबसे धनी व्यक्ति थे.
मुकेश अंबानी इस समय रिलायंस उद्योग समूह के चेयरमैन हैं और अनिल अंबानी वाइस चेयरमैन.
दोनों ही भाई कंपनी के प्रबंध निदेशक भी हैं.
प्रेमजी नीचे
बिज़नेस स्टैंडर्ड अख़बार ने 1999 में सबसे धनी भारतीय का सर्वेक्षण शुरू किया था.
उस समय अज़ीम प्रेमजी इस सूची में सबसे ऊपर थे. लेकिन इसका प्रमुख कारण था कंप्यूटर कंपनियों के आसमान छूते भाव.
सिर्फ़ एक साल में विप्रो के शेयरों ने अपनी कीमत में चालीस प्रतिशत गिरावट देखी है और प्रेमजी पहले से दूसरे स्थान पर चले गए हैं.
प्रेमजी की कुल संपत्ति इस समय 18, 964 करोड़ रुपए है.
इस सूची में तीसरे स्थान पर दवा बनाने वाली कंपनी रैनबैक्सी के मालविंदर और शिवेंदर सिंह हैं.
उनकी संपत्ति 5,086 करोड़ रुपए आँकी गई है.
इसके बाद 5,000 करोड़ के साथ भारती टेलीकॉम के सुनील मित्तल हैं और फिर 4,299 करोड़ की संपत्ति वाले एचसीएल टेक्नॉलॉजीस के शिव नादर.
अच्छा साल
अख़बार का मानना है कि यह साल अमीर लोगों के लिए बहुत अच्छा रहा है.
शेयर बाज़ार की अच्छी स्थिति के कारण इस साल 15 उद्योगपति अरबपतियों की सूची में शामिल हुए हैं.
अब इस सूची में अब 125 लोग हो गए हैं.
इसमें सत्यम कंप्यूटर बी रामलिंग राजू, इंफ़ोसिस के नंदन निलेकानी, सुधा मूर्ति, अक्षत मूर्ति और एस गोपालकृष्णन हैं.
इंफ़ोसिस के चेयरमैन एनआर नारायणमूर्ति की संपत्ति का ब्यौरा नहीं मिल सका है.
31 अगस्त 2003 तक इन सबसे अमीर 125 लोगों/कंपनियों की कुल संपत्ति एक हज़ार दो सौ नौ अरब इक्वान करोड़ रुपए थी.