अरुण गोयल: लोकसभा इलेक्शन से ठीक पहले इस्तीफ़ा देने वाले चुनाव आयुक्त - प्रेस रिव्यू

अरुण गोयल

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शनिवार देर शाम पंजाब काडर के पूर्व आईएएस अधिकारी अरुण गोयल ने चुनाव आयुक्त के पद से इस्तीफ़ा दे दिया. उनका इस्तीफ़ा ऐसे वक्त हुआ है जब देश में लोकसभा चुनाव सिर पर हैं और उनके कार्यकाल के ख़त्म होने में अभी तीन साल बाक़ी हैं.

अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार अरुण गोयल के इस्तीफ़े ने जितना चौंकाया उतना ही नवंबर 2022 में अचानक हुई उनकी नियुक्ति ने भी चौंकाया था. उनकी नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी गई थी.

बतौर आईएएस अधिकारी 37 साल तक काम करने के बाद अरुण गोयल 31 दिसंबर 2022 को रिटायर होने वाले थे. लेकिन इससे महीनाभर पहले 18 नवंबर 2022 को उन्होंने वॉलंटरी रिटायरमेन्ट ले लिया.

इसके एक दिन बाद 19 नवंबर 2022 को राष्ट्रपति ने उन्हें चुनाव आयुक्त के पद पर नियुक्त कर दिया. 15 मई 2022 से खाली पड़े इस पद पर नियुक्ति के दो दिन बाद अरुण गोयल ने 21 नवंबर 2022 को कार्यभार संभाल लिया.

2022 में जिस वक्त अरुण गोयल की नियुक्ति हुई उस वक्त सुप्रीम कोर्ट मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त कि नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर याचिकाओं की सुनवाई कर रहा था.

चुनाव और इससे जुड़े मामलों में पारदर्शिता के लिए काम कर रही संस्था असोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक राइस्ट (एडीआर) ने अरुण गोयल की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और इसे एकतरफा करार दिया.

संस्था की दलील थी कि गोयल को ज़रूर पहले से जानकारी रही होगी इसलिए उन्होंने चुनाव आयुक्त के पद पर नियुक्ति से ठीक पहले वॉलंटरी रिटायरमेन्ट ले लिया. ये याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी थी.

अरुण गोयल कौन हैं?

मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार

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अरुण गोयल का इस्तीफ़ा ऐसे वक्त आया है जब चुनाव आयोग लोकसभा चुनावों की तैयारियों में जुटा है और अधिकारी देशभर में घूम-घूम कर तैयारियों का जायज़ा ले रहे हैं. चुनावों की तारीखों का भी जल्द एलान हो सकता है.

चुनाव आयुक्त अनूप चंद्र पांडे बीते महीने रिटायर हुए हैं. गोयल के इस्तीफ़े के बाद तीन सदस्यों वाले इस संगठन में अब केवल मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार रह गए गए हैं.

चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार 1962 में पंजाब के पटियाला में जन्मे गोयल ने गणित में मास्टर्स डिग्री हासिल की है.

वॉलंटरी रिटायरमेन्ट लेते वक्त अरुण गोयल भारी उद्योग मंत्रालय में बतौर सचिव काम कर रहे थे. इससे पहले वो संस्कृति मंत्रालय में बतौर सचिव और दिल्ली विकास प्राधिकरण में बतौर वाइस चेयरपर्सन काम कर चुके थे.

भारी उद्योग मंत्रालय में काम के दौरान उन्होंने ई-व्हीकल के प्रसार को लेकर काम किया. इस दौरान उन्होंने ऑटो इंडस्ट्री के लिए पीएलआई (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेन्टिव) स्कीम लागू किया और इस सेक्टर में निवेश को बढ़ाया.

उन्होंने कुछ वक्त पंजाब सरकार के लिए भी काम किया और बतौर मुख्य सचिव न्यू चंडीगढ़ के मास्टरप्लान को लागू करने और ऊर्जा के क्षेत्र में सुधारों को लागू करने में में अहम भूमिका निभाई.

ट्रेन में गोली चलाने के मामले में दो और आरपीएफ़ जवान बर्ख़ास्त

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बीते साल जयपुर से मुंबई जा रही ट्रेन में आरपीएफ़ (रेलवे सुरक्षा बल) जवान की ओर से गोली चलाए जाने वाले मामले में दो और आरपीएफ़ जवानों को बर्ख़ास्त कर दिया गया है.

ये दोनों उस वक्त ट्रेन में सवार थे जिसमें कथित तौर पर चेतन सिंह चौधरी ने अपने वरिष्ठ अधिकारी समेत कुछ यात्रियों पर गोली चलाई थी.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक अन्य ख़बर के अनुसार अब इस मामले में पश्चिमी रेलवे के मुंबई डिविज़न के सीनियर डिविज़नल सिक्योरिटी कमिश्नर एसकेएस राठौड़ ने अमय आचार्य और नरेंद्र परमार नाम के दो कॉन्स्टेबल को बर्ख़ास्त कर दिया है.

बर्ख़ास्तगी के आदेश के अनुसार "यात्रियों की सुरक्षा और बचाव इन कॉन्स्टेबल्स की ज़िम्मेदारी थी लेकिन वो ऐसा करने में नाकाम रहे. इनकी इस हरकत से आरपीएफ़ पर यात्रियों का भरोसा कम होगा और फोर्स के अन्य सदस्यों को संदेश जएगा कि फोर्स में अनुशासनहीनता है. सेवा में नाकाम रहने के बाद भी इन्हें सेवा में रखना आरपीएफ़ के लिए नुक़सानदेह होगा, इसलिए ये सुनिश्चित करने के लिए कि इस तरह की घटना फिर से न हो इन्हें बर्ख़ास्त किया जाता है."

बीते साल आरपीएफ़ जवान चेतन सिंह चौधरी ने ट्रेन में अपने वरिष्ठ एएसआई टीकाराम मीणा पर गोली चलाई थी. गोलीबारी की इस घटना में टीकाराम के अलावा तीन यात्रियों की भी मौत हो गई थी.

इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसमें चेतन सिंह कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां करते हुए नज़र आ रहे थे. इन टिप्पणियों के आधार पर इस घटना को नफ़रती हिंसा से जोड़कर देखा गया था.

12 मार्च को पोखरण में मिलेगी 'आत्मनिर्भर भारत' की सेना की झलक

मोदी टैंक

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दो दिन बाद पोखरण में प्रधानमंत्री इस बात का जायज़ा लेंगे कि आत्मनिर्भरता से अपनी ताकत बढ़ाने की सेना की योजना किस तरह आगे बढ़ रही है.

अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार भारत-पाकिस्तान सीमा के पास पोखरण में होने वाले इस सैन्य अभ्यास 'भारत शक्ति' में तीनों सेनाएं (वायु, थल और नौसेना) हिस्सा लेंगी.

इसकी जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया है कि इस दौरान ये दिखाया जाएगा कि युद्ध की स्थिति में तीनों सेनाएं किस तरह साथ मिलकर काम करती हैं और तीनों के बीच समन्वय किस तेज़ी से होता है.

आर्मी डिज़ाइन ब्यूरो के अतिरिक्त महानिदेशक मेजर जनरल सीएस मान ने अख़बार को बताया कि इस दौरान तीनों सेनाएं देश में बने हथियारों की काबिलियत का भी प्रदर्शन करेंगी.

अख़बार के अनुसार इस दौरान लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस, लाइट हेलिकॉप्टर प्रचंड, एडवान्स्ड लाइट हेलिकॉप्टर्स,यूटिलिटी हेलिकॉप्टर्स, एंटी ड्रोन सिस्टम, टी-90 टैंक, ड्रोन से छोड़े जाने वाले बम और मिसाइलें, मानवरहित एरियल व्हीकल, रॉकेट और रडार के साथ साथ धनुष, शारंग और के9 वज्र जैसी आधुनिक बंदूकों का इस्तेमाल भी दिखाया जाएगा.

मालदीव में भारतीय पर्यटकों की संख्या हुई कम

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भारत और मालदीव के बीच बीते कुछ महीनों से चल रहे कूटनीतिक विवाद का असर मालदीव के पर्यटन पर पड़ता दिख रहा है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने मालदीव की न्यूज़ वेबसाइट अधाधू में छपी एक ख़बर के हवाले से लिखा है कि बीते साल के मुक़ाबले इस साल मालदीव जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में 33 फ़ीसदी की कमी आई है. अधाधू ने ये जानकारी मालदीव पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के हवाले से छापी है.

इन आंकड़ों के अनुसार बीते साल के आंकड़े बताते हैं कि 04 मार्च 2023 तक 41,054 भारतीय पर्यटक मालदीव गए थे. वहीं 02 मार्च 2024 तक मालदीव में पहुंचने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या घटकर 27,244 हो गई है.

बीते साल मालदीव जाने वाले पर्यटकों के मामले में भारत दूसरा सबसे बड़ा देश था लेकिन इस साल भारत दूसरे पायदान से गिरकर छठे स्थान पर आ गया है. 2021 से 2023 के बीच पर्यटकों के मामले में भारत सबसे ऊपर था.

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