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भारत पाकिस्तान तनाव: दोनों देशों के लिए कूटनीति का रास्ता कितना असरदार होगा?- द लेंस
पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जो तनाव शुरू हुआ वो सैन्य संघर्ष में बदला और अब उसे एक महीना हो चुका है.
दोनों ओर से सैन्य कार्रवाई हुई, बयानबाज़ियां हुईं और एक बार फिर कूटनीति और सैन्य ताकत के बीच की रेखा धुंधली होती चली गई.
इस बीच भारत और पाकिस्तान दोनों ने ही दुनिया के कई देशों में अपने राजनयिक दल भेजे. एक तरफ भारत ने आतंक और सीमा सुरक्षा के सवालों पर समर्थन मांगा, तो वहीं पाकिस्तान ने मानवाधिकारों और क्षेत्रीय अस्थिरता का मुद्दा उठाया.
भारत में इस मुद्दे को लेकर सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच बहस छिड़ी हुई है. कुछ इसे सुरक्षा का सवाल मानते हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक फ़ायदे का ज़रिया मान रहे हैं. पाकिस्तान में सरकार और सेना की जुगलबंदी इस पूरे मामले की दिशा तय करती दिखी.
तो क्या यह संघर्ष सिर्फ़ सरहद तक सीमित है? या फिर यह कूटनीति, राजनीति और नैरेटिव की कई स्तर वाली लड़ाई बन चुका है?
भारत में मोदी सरकार ने पिछले एक महीने में जो क़दम उठाए हैं, उससे जनता का समर्थन हासिल करने में क्या उन्हें मदद मिली है? पाकिस्तान में सेना और सरकार की इमेज पर क्या असर हुआ है? दोनों देशों ने कूटनीति का जो रास्ता अपनाया है, वो कितना और किस तरह असरदार हो सकता है?
द लेंस के आज के एपिसोड में इन सभी मुद्दों पर चर्चा की गई.
इस चर्चा में कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ़ जर्नलिज़म मुकेश शर्मा के साथ शामिल हुईं वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी, कौटिल्य स्कूल ऑफ़ पब्लिक पॉलिसी में अंतरराष्ट्रीय संबंधों की असिस्टेंट प्रोफ़ेसर कनिका राखरा और बीबीसी न्यूज़ उर्दू के सीनियर न्यूज़ एडिटर आसिफ़ फ़ारुक़ी.
प्रोड्यूसरः शिवालिका पुरी
गेस्ट कोऑर्डिनेटरः संगीता यादव
वीडियो एडिटिंगः सुमित वैद्य
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