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ईरान और इसराइल के बीच सीज़फ़ायर से क्या हासिल हुआ? - द लेंस
ईरान और इसराइल के बीच 13 जून को शुरू हुए संघर्ष में 22 जून को अमेरिका भी उतर गया.
अमेरिका ने ईरान के नतांज़, फ़ोर्दो और इस्फ़हान जैसे परमाणु ठिकानों पर हमले किए. फिर 24 जून को, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और क़तर की मध्यस्थता से एक युद्धविराम लागू हुआ, जिसने इस तनाव को अस्थायी रूप से रोका है.
इस संघर्ष ने वैश्विक बाज़ारों को भी प्रभावित किया है. युद्धविराम के बाद तेल की कीमतें गिरीं और शेयर बाज़ारों में उछाल आया, क्योंकि दुनिया को होर्मुज़ स्ट्रेट में रुकावट का डर कम हुआ, जो दुनिया की तेल आपूर्ति का 20% हिस्सा संभालता है.
लेकिन अगर यह युद्धविराम टूटता है, तो क्या वैश्विक अर्थव्यवस्था फिर से संकट में पड़ सकती है?
इस 12 दिन के संघर्ष के बाद सवाल उठ रहे हैं कि अमेरिकी और इसराइली कार्रवाई से आख़िर हासिल क्या हुआ, अब जो संघर्ष विराम हुआ है क्या वो टिकेगा, क्या इस संघर्ष का कोई कूटनीतिक रास्ता है, क्या इसराइल की मंशा ईरान में सत्ता परिवर्तन की है और भारत कैसे इस संघर्ष में संतुलन बना रहा है.
द लेंस के आज के एपिसोड में इसी मुद्दे पर चर्चा की गई.
कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ़ जर्नलिज़्म मुकेश शर्मा के साथ इस चर्चा में हिस्सा लिया दिल्ली विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय संबंधों और विश्व राजनीति के रिटायर्ड प्रोफ़ेसर अचिन वनइक, ग्रेटर वेस्ट एशिया फ़ोरम की सदस्य डॉक्टर मंजरी सिंह और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ़ इंटरनेशनल स्टडीज़ के पूर्व डीन प्रोफ़ेसर अश्वनी कुमार महापात्रा ने.
प्रोड्यूसरः शिवालिका पुरी
गेस्ट कोऑर्डिनेटरः संगीता यादव
वीडियो एडिटिंगः सुमित वैद
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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