कंबाइंड मेरीटाइम फोर्सेज़ क्या है, जिसमें शामिल हुआ भारत, जानिए सवालों के जवाब

दिल्ली में आयोजित अमेरिका-भारत की टू प्लस टू बैठक में शामिल दोनों देशों के रक्षा और विदेश मंत्री
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    • Author, राघवेंद्र राव
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच हुई पांचवीं वार्षिक टू प्लस टू मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण फ़ैसला हुआ.

भारत-अमेरिका के विदेश और रक्षा मंत्रियों के बीच हुई इस बैठक में फ़ैसला लिया गया कि भारत कंबाइंड मेरीटाइम फोर्सेज़ की पूर्ण सदस्यता लेगा.

कंबाइंड मेरीटाइम फोर्स का नेतृत्व अमेरिका करता है और इसलिए ये दिलचस्प है कि भारत ने एक ऐसे सुरक्षा बल में शामिल होने का फ़ैसला किया है, जिसका नेतृत्व संयुक्त राष्ट्र नहीं कर रहा है.

हिन्द महासागर में चीन के बढ़ते दबदबे को देखते हुए माना जा रहा है कि भारत का इस संगठन में शामिल होना वक़्त की मांग और एक रणनीतिक ज़रूरत है.

आइये कंबाइंड मेरीटाइम फोर्सेज़ के बारे में जानते हैं.

कंबाइंड मेरीटाइम फोर्सेज़ क्या है?

सीएमएफ के अभ्यास में शामिल भारतीय नौसेना का पोत
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कंबाइंड मेरीटाइम फोर्सेज़ एक ऐसी समुद्री साझेदारी है, जिसका मक़सद 3.2 मिलियन वर्ग के विस्तार वाले अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में नॉन-स्टेट एक्टर्स का मुक़ाबला करके रूल्स-बेस्ड इंटरनेशनल ऑर्डर या नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखना है. नॉन-स्टेट एक्टर्स का मतलब है, वैसे लोग जिनका किसी देश या सरकार से संबंध नहीं है.

इस फ़ोर्स का काम उस खुले समुद्र में सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देना है, जिसमें दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग लेन शामिल हैं.

सीएमएफ दुनिया की सबसे बड़ी बहुराष्ट्रीय नौसैनिक साझेदारी है, जिसकी स्थापना साल 2001 में की गई थी. इसका मुख्यालय बहरीन में स्थित है.

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक़ साल 2021 के बाद से सीएमएफ़ ने पूरे मध्य-पूर्व में समुद्री गश्त के दौरान एक अरब डॉलर से अधिक के ग़ैर-क़ानूनी ड्रग्स ज़ब्त किए हैं.

सीएमएफ़ का काम क्या है?

नई दिल्ली में आयोजित भारत-अमेरिका की टू प्लस टू बैठक
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सीएमएफ़ का मुख्य काम नशीले पदार्थों की तस्करी रोकना और समुद्री डकैती से निपटना है.

इसके अलावा क्षेत्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करना, समग्र सुरक्षा और स्थिरता में सुधार के लिए क्षमताओं को मज़बूत करने के लिए क्षेत्रीय और अन्य भागीदारों के साथ जुड़ना. इसके अलावा ग़ैर-कानूनी नॉन-स्टेट एक्टर्स की गतिविधियों से मुक्त एक सुरक्षित समुद्री वातावरण को बढ़ावा देना है.

ज़रूरत पड़ने पर ये फ़ोर्स पर्यावरण से जुड़े मुद्दों और मानवीय आपदा राहत के लिए भी काम करती है.

सीएमएफ़ के पाँच संयुक्त कार्य बल हैं, जिन्हें कंबाइंड टास्क फ़ोर्स या सीटीएफ कहा जाता है. इनमें से एक टास्क फ़ोर्स अरब की खाड़ी के बाहर समुद्री सुरक्षा का संचालन करती है, जिसमें उसका काम ओमान की खाड़ी और हिंद महासागर पर केंद्रित है. सीएमएफ़ की दूसरी टास्क फ़ोर्स काउंटर-पाइरेसी का काम करती है.

तीसरी टास्क फ़ोर्स का काम अरब की खाड़ी के अंदर समुद्री सुरक्षा को सुनिश्चित करना है और चौथी टास्क फ़ोर्स लाल सागर और अदन की खाड़ी की समुद्री सुरक्षा संभालती है.

इसी साल मई में एक पांचवीं टास्क फ़ोर्स का गठन किया गया है, जिसका काम समुद्री सुरक्षा प्रशिक्षण देना है.

इन टास्क फोर्सेज़ का नेतृत्व सदस्य देश बारी-बारी से करते हैं.

पाकिस्तान, अमेरिका, फ्रांस, तुर्किये, कुवैत और यूनाइटेड किंगडम कुछ ऐसे देश हैं, जिन्होंने इन टास्क फोर्सेज़ का नेतृत्व सबसे ज़्यादा बार किया है.

कौन हैं सीएमएफ के सदस्य?

दिल्ली में आयोजित अमेरिका-भारत की टू प्लस टू बैठक में शामिल दोनों देशों के रक्षा और विदेश मंत्री
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भारत के सीएमएफ़ की पूर्ण सदस्यता लेने के बाद अब इसके 38 सदस्य हैं.

अन्य सदस्य देशों में ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, बेल्जियम, ब्राजील, कनाडा, डेनमार्क, जिबूती, मिस्र, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, इराक, इटली, जापान, जॉर्डन, केन्या, कोरिया गणराज्य, कुवैत, मलेशिया, नीदरलैंड , न्यूजीलैंड, नॉर्वे, ओमान, पाकिस्तान, फिलीपींस, पुर्तगाल, कतर, सऊदी अरब, सेशेल्स, सिंगापुर, स्पेन, थाईलैंड, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और यमन शामिल हैं.

हालाँकि इस साल मई के महीने में संयुक्त अरब अमीरात ने कहा कि वो सीएमएफ़ से हट रहा है. संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि सभी साझेदारों के साथ प्रभावी सुरक्षा सहयोग के मूल्यांकन के बाद उसने सीएमएफ़ से अपनी भागीदारी वापस लेने का फ़ैसला किया है.

महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों पर अपनी रणनीतिक स्थिति की वजह से संयुक्त अरब अमीरात सीएमएफ़ गठबंधन का एक सक्रिय भागीदार था.

अमेरिकी नौसेना के वाइस एडमिरल रैंक का अधिकारी सीएमएफ़ की कमान संभालता है. यही अधिकारी जो यूएस नेवल फोर्सेज़ सेंट्रल कमांड और यूएस नेवी फिफ्थ फ्लीट के कमांडर के रूप में भी कार्य करता है.

सीएमएफ़ की चार कमांड अमेरिकी नौसेना सहायता गतिविधि बहरीन में स्थित हैं. सीएमएफ़ का डिप्टी कमांडर यूनाइटेड किंगडम रॉयल नेवी का कमोडोर होता है. सीएमएफ़ के मुख्यालय में अन्य वरिष्ठ कर्मचारी भूमिकाएँ सदस्य देशों के कर्मियों द्वारा भरी जाती हैं.

सीएमएफ़ कैसे काम करता है?

कंबाइंड मेरीटाइम फोर्सेज़ के दफ्तर में भारतीय सैन्य अधिकारी
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सीएमएफ़ में शामिल देश व्यापार और वाणिज्य के खुले प्रवाह की रक्षा करके और समुद्री सुरक्षा में सुधार करके समुद्री इलाक़ों में चल रही ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियों को रोककर नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था बनाए रखने के लिए काम करते हैं.

इस साझेदारी में शामिल हर देश का योगदान इस बात पर निर्भर करता है कि वो ज़रूरत पड़ने कितने नौसैनिक संसाधन (जहाज़, पनडुब्बी) कितने समय में उपलब्ध करवा सकता है.

सीएमएफ़ का कहना है कि वो एक लचीला संगठन है और उसमें शामिल 38 राष्ट्र किसी निश्चित राजनीतिक या सैन्य शासनादेश से बंधे नहीं हैं.

सीएमएफ़ के मुताबिक़ वो सहायता के लिए उन युद्धपोतों को भी बुला सकता है जो स्पष्ट रूप से सीएमएफ़ को नहीं सौंपे गए हैं. इस तरह इन देशों के युद्धपोत अपने-अपने देशों के काम करने के साथ-साथ सीएमएफ़ की मदद भी कर पाते हैं.

भारत और सीएमएफ की पृष्ठभूमि

सीएमएफ के अभ्यास में शामिल भारतीय नौसेना का पोत आईएनएस त्रिकंद
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अप्रैल 2022 में भारत-अमेरिका टू प्लस टू मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान भारत कंबाइंड मेरीटाइम फोर्स (सीएमएफ़) में एसोसिएट पार्टनर के तौर पर शामिल हुआ था.

इस बात की घोषणा करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि इससे पश्चिमी हिंद महासागर में क्षेत्रीय सुरक्षा में सहयोग मजबूत होगा.

भारतीय नौसेना के डिप्टी चीफ़ वाइस एडमिरल संजय महिंद्रू जुलाई 2022 में बहरीन में सीएमएफ़ के मुख्यालय गए और इस संगठन को भारत की "एसोसिएट सपोर्ट" की शुरुआत की.

सितंबर 2022 में भारतीय नौसेना के जहाज़ आईएनएस सुनयना ने सेशेल्स में आयोजित सीएमएफ़ की एक्सरसाइज़ में हिस्सा लिया.

सितंबर 2022 में भारतीय युद्धपोत आईएनएस त्रिकंड और पी-8 आई लॉन्ग रेंज मेरीटाइम पट्रोल एरयरक्राफ्ट ने 'सी स्वोर्ड 2' नाम के ऑपरेशन में हिस्सा लिया जो उत्तर पश्चिमी अरब सागर में एक हफ़्ते तक चला. ये ऑपरेशन सीएमएफ़ के नेतृत्व में चलाया गया था और इसका मक़सद आतंकवाद का मुक़ाबला करना और नशीले पदार्थों के व्यापार और तस्करी को रोकना था.

इस साल जुलाई में आईएनएस सुनयना ने फिर एक बार सीएमएफ़ द्वारा आयोजित ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 2023 में हिस्सा लिया.

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