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भारत-अमेरिका तनाव में क्या वहाँ बसे भारतीय कुछ नहीं कर सकते- द लेंस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बहुत से विश्लेषक अनप्रिडिक्टेबल कहते हैं, यानी एक ऐसे राष्ट्रपति जो कभी भी अप्रत्याशित रूप से कोई क़दम उठा सकते हैं.
अब कहा जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरे कार्यकाल में अपनी उस छवि को बरक़रार रखा है. अपने इसी बर्ताव के तहत वो नेगोशिएट यानी मोल-भाव करने की कोशिश करते हैं.
वो भारत पर कुल 50 फ़ीसदी टैरिफ़ लगा चुके हैं. ये मुद्दा भारत की कूटनीति के साथ ही राजनीति को भी प्रभावित कर रहा है. साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस पर लगातार टिप्पणियां हो रही हैं.
इस बीच जब चीन ने एससीओ की बैठक आयोजित की, जहां पीएम मोदी की शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बातचीत हुई, इससे भी ये संकेत देने की कोशिश की गई कि भारत किसी एक पक्ष पर निर्भर नहीं है. ऐसे में अब कई सवाल उठ रहे हैं.
क्या अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप पर भारत को लेकर कहीं से कोई दबाव नहीं है? भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों पर इसका कितना असर हो सकता है? एससीओ की बैठक से निकली तस्वीरें अमेरिका को कितना असहज करेंगी और क्या पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की जिस घनिष्ठता की चर्चा होती थी, वो अब नहीं रही?
द लेंस के आज के एपिसोड में इन सभी मुद्दों पर चर्चा की गई.
इस चर्चा में कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ़ जर्नलिज़म मुकेश शर्मा के साथ शामिल हुए अमेरिका में भारत के राजदूत रहे वरिष्ठ पूर्व राजनयिक नवतेज सरना और वॉशिंगटन से पत्रकार और लेखिका सीमा सिरोही.
प्रोड्यूसरः सईदुज़्जमान
गेस्ट कोऑर्डिनेटरः संगीता यादव
वीडियो एडिटिंगः जमशेद अली ख़ान
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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