मोहन यादव को लेकर 'ज़मीन सौदे' से जुड़े आरोपों पर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने

मोहन यादव

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इमेज कैप्शन, ज़मीन सौदे से जुड़े आरोपों पर सीएम मोहन यादव ने प्रतिक्रिया नहीं दी है (फ़ाइल फ़ोटो)
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार पर उज्जैन में सरकारी विकास परियोजनाओं वाले क्षेत्रों में 168 एकड़ ज़मीन ख़रीदने के आरोप लगे हैं.

विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मामले में सीएम यादव पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए न्यायिक जांच की मांग की है.

वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इन दावों को ख़ारिज करते हुए कांग्रेस पर 'जातिवादी' होने का आरोप लगाया है.

ज़मीन सौदे से जुड़े आरोपों पर सीएम मोहन यादव या मध्य प्रदेश के सीएम कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.

विपक्ष ने मोहन यादव पर लगाए ये आरोप

जीतू पटवारी और पवन खेड़ा

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इमेज कैप्शन, कांग्रेस नेता जीतू पटवारी और पवन खेड़ा ने इस मामले में प्रेस कॉन्फ़्रेंस की

विपक्षी दलों ने अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए सीएम मोहन यादव पर 'ज़मीन घोटाले से जुड़े होने' के आरोप लगाए.

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष (पीसीसी चीफ़) जीतू पटवारी ने इस मामले में बुधवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर सीएम मोहन यादव पर गंभीर आरोप लगाए.

पवन खेड़ा ने कहा, "सीएम मोहन यादव ने अपने परिवार के साथ मिलकर उज्जैन में सैकड़ों एकड़ ज़मीन ख़रीद ली. मुख्यमंत्री बनने के बाद ख़रीदी गई 168 एकड़ में से 111 एकड़ ज़मीन उस क्षेत्र में ख़रीदी जहां सिंहस्थ कुंभ आने वाला है. उज्जैन के जिस क्षेत्र में 2035 के मास्टर प्लान के ऊपर काम होना है, मोहन यादव के परिवार ने वहां ज़मीनें ख़रीदी हैं. इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक्शन लेने की उम्मीद नहीं है."

उन्होंने कहा, "उज्जैन और अयोध्या से देश ही नहीं, बल्कि विदेश के लोगों की आस्था जुड़ी है. इन तीर्थों से पैसा लूटना आस्थावान लोगों की पीठ में खंजर घोंपने जैसा है. उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ होने वाला है. इस बारे में मुख्यमंत्री को पता है और उससे जुड़ी फ़ाइलें उनसे होकर गुज़रती हैं, इसलिए वे अपनी क़लम की ताक़त से हेरफेर कर सकते हैं."

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जीतू पटवारी ने आरोप लगाए कि मध्य प्रदेश में मोहन यादव ने मुख्यमंत्री बनने के बाद सैकड़ों एकड़ ज़मीन ख़रीदी.

जीतू पटवारी ने प्रेस वार्ता में कहा, "उज्जैन में 500 करोड़ रुपये की ज़मीन एक ट्रस्ट को 1 रुपये में दे दी गई. उसके ट्रस्टी श्री राम जी नाम के व्यक्ति हैं, जो मोहन यादव के सांस्कृतिक सलाहकार हैं."

शिवसेना नेता और राज्यसभा की पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस मामले में प्रतिक्रिया दी. उन्होंने अख़बार की कटिंग साझा करते हुए एक्स पर लिखा, "अयोध्या की भगवान श्री राम की पावन भूमि से लेकर बाबा महाकाल की भूमि तक सिर्फ़ बीजेपी का महाभ्रष्टाचार."

स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने एक्स पर लिखा, "राष्ट्रवाद के नाम पर आंखों में धूल झोंक कर क्या खेल चल रहा है. मोहन यादव या तो जवाब दें या इस्तीफ़ा!"

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि उन्हें अब मोहन यादव के घर जाना चाहिए.

उन्होंने एक्स पर लिखा, "अयोध्या, उज्जैन तो झांकी है, काशी मथुरा बाक़ी है. ईडी वालों, सोकर उठ गए हो तो मोहन प्यारे के भी घर चले जाओ, पूछ लो महाकाल के धाम में डाका क्यों डाला. वैसे देश जानता है तुम्हारी आवाज़ नहीं निकलेगी."

कांग्रेस ने सीएम मोहन यादव से पूछे ये सवाल

जीतू पटवारी

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इमेज कैप्शन, कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने पूछा कि इस मामले में क्या मुख्यमंत्री न्यायिक जांच की पहल करेंगे (फ़ाइल फ़ोटो)

पीसीसी चीफ़ जीतू पटवारी ने सीएम मोहन यादव से कुछ सवाल पूछे हैं-

  • क्या सरकार संबधित क्षेत्र के मास्टर प्लान में हुए बदलाव को सार्वजनिक करेगी?
  • क्या इन परियोजनाओं की जानकारी वहां के संबंधित किसानों को थी, जिनकी वहां पहले से ज़मीनें हैं?
  • क्या आप आगे बढ़कर खुद इस मामले की न्यायिक जांच की पहल करेंगे?
  • आख़िर 500 करोड़ रुपये की ज़मीन 1 रुपये में क्यों दी गई?
  • अगर अख़बार की रिपोर्ट झूठी है, तो एफ़आईआर क्यों नहीं हुई?
  • सीएम बनने के बाद मोहन यादव के परिवार ने तेज़ी से जो ज़मीन खरीदी, उसके लिए पैसे कहां से आए?

मोहन यादव पर लगे आरोपों को लेकर बीजेपी भी बोली

हेमंत खंडेलवाल

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इमेज कैप्शन, मध्य प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सीएम पर लगे आरोपों को निराधार बताया है (फ़ाइल फ़ोटो)

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर लगे आरोपों को पूरी तरह ग़लत बताया है.

उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि भ्रम की स्थिति पैदा करने के लिए कांग्रेस और उनके नेताओं ने ऐसा किया है.

हेमंत खंडेलवाल ने कहा, "मुख्यमंत्री की ओर से 2023 के विधानसभा चुनाव में जो नामांकन दाख़िल किया था, उस स्थिति में उनके पास 17 एकड़ की जो ज़मीन थी, उसमें अब तक कुछ भी परिवर्तन नहीं हुआ है. सीएम मोहन यादव की पत्नी सीमा यादव के नाम से 12.29 एकड़ की थी, इसमें भी 2026 में कोई परिवर्तन नहीं हुआ."

"कांग्रेस के आरोपों में 'सिद्धि विनायक' नाम की कंपनी का ज़िक्र है, उसके पास 2023 में 68 एकड़ ज़मीन थी, जो जून में घटकर 65 एकड़ रह गई. मुख्यमंत्री ने 2017 में ही इस कंपनी के डायरेक्टर के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. "

उन्होंने आगे कहा, "सीएम मोहन यादव के पुत्र वैभव के पास भी 2023 के पहले 16 एकड़ ज़मीन थी. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके पुत्र से जुड़ी ज़मीनों में भी किसी तरह का कोई परिवर्तन नहीं आया और यह सारी ज़मीन मास्टर प्लान लागू होने के पहले की थी. मुख्यमंत्री की पुत्रवधू शालिनी यादव, जिनका हाल ही में वैभव से विवाह हुआ है. उन्होंने दस एकड़ की कृषि भूमि खरीदी, जो मास्टर प्लान एरिया से बाहर थी."

हेमंत खंडेलवाल

हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि आरोपों में जिन रिश्तेदारों का ज़िक्र है, वह पूरी तरह से ग़लत हैं. उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार का उससे कोई लेना देना नहीं है.

खंडेलवाल ने आगे कहा "उनके रिश्तेदारों का अपना स्वतंत्र अस्तित्व है. लेकिन मेरी जानकारी में यह आया है कि उन पर लगाए आरोपों से जुड़े तथ्य भी ग़लत हैं."

हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस पर जातिवादी होने का आरोप लगाते हुए कहा, "जब-जब पिछड़े वर्ग का मुख्यमंत्री इस प्रदेश को मिला, तो उनके ख़िलाफ़ षड्यंत्र करके उनको कमज़ोर करने का काम किया गया.".

अखिलेश यादव का कांग्रेस से अलग स्टैंड

अखिलेश यादव

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इमेज कैप्शन, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी ने मोहन यादव को बदनाम करने के साज़िश की है (फ़ाइल फ़ोटो)

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर लगे ज़मीन से जुड़े आरोपों पर समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी है.

सपा इंडिया गठबंधन का हिस्सा है, फिर भी अखिलेश यादव ने कांग्रेस से अलग स्टैंड लिया है. उन्होंने लखनऊ में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मोहन यादव को बदनाम करने के लिए बीजेपी ने यह साज़िश की है.

अखिलेश यादव ने कहा, "मोहन यादव को बदनाम करने के लिए बीजेपी ने यह साज़िश की है. और अगर मोहन यादव पर ये आरोप है, तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने तो 300 से 600 एकड़ ज़मीन ली है."

उन्होंने कहा, "यह कोई नई बात नहीं है कि उन्होंने ज़मीन ली है. वो पहले रियल एस्टेट का काम करते थे. आप यह क्यों भूल जाते हैं? बीजेपी मुख्यमंत्री बदलना चाहती है, इसलिए ये आरोप लगवा रही है."

अखिलेश ने कहा, "वो मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों को हटाना चाहते हैं. वो इन दोनों को इसलिए हटाना चाहते हैं क्योंकि वो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को हटाना चाहते हैं. यह उन्हें हटाने की एक साज़िश है."

क्या हैं ज़मीन से जुड़े आरोप

मोहन यादव

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इमेज कैप्शन, एक अंग्रेज़ी अख़बार की रिपोर्ट के बाद मोहन यादव के ख़िलाफ़ विपक्षा हमलावर है

इंडियन एक्सप्रेस ने 23 जून, 2026 को एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें सीएम मोहन यादव से जुड़ा यह कथित विवाद सामने आया है.

रिपोर्ट के मुताबिक़, 13 दिसंबर 2023 को मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिजन और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने 137 प्लॉट ख़रीदे.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 137 प्लॉट में कुल ज़मीन लगभग 168 एकड़ की है और इन्हें क़रीब 45 करोड़ रुपये में ख़रीदा गया.

रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ प्लॉट बाद में बेच दिए गए थे. 2026 के सौदों का रिकॉर्ड फ़िलहाल सरकारी दस्तावेज़ों में पूरी तरह अपडेटेड नहीं है.

अख़बार में छपी रिपोर्ट के अनुसार ख़रीदारी मुख्यमंत्री की पत्नी सीमा यादव, बेटे वैभव की पत्नी शालिनी यादव, भाइयों नंदलाल और नारायण यादव, नारायण की पत्नी रेखा यादव, उनके बेटे अभय यादव, चचेरे भाई गोविंद यादव और निलेश यादव ने की है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट दो सवाल उठाती है,"पहला यह कि ख़रीदी गई अधिकतर ज़मीनें उन इलाक़ों में हैं जहां हाईवे या सड़कें बन रही हैं. दूसरा, मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने से पहले भी उनके परिजनों के पास काफ़ी ज़मीन थी, लेकिन सीएम बनते ही इसमें तेज़ी दिखी."

रिपोर्ट में दावा है कि उज्जैन मास्टर प्लान मई 2023 में जारी हो गया था. उस समय मोहन यादव भले मध्य प्रदेश के सीएम नहीं थे, लेकिन उनका पॉलिटिकल करियर उज्जैन से जुड़ा है. मोहन यादव 2004 से 2010 तक उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रहे. वहीं, 2011 से 2013 तक मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम के प्रमुख रहे और 2013 से उज्जैन दक्षिण सीट से विधायक भी हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है, "सीएम बनने के बाद उज्जैन और उसके आसपास नई सड़क और हाईवे प्रोजेक्ट्स की घोषणा की. स्थानीय रियल एस्टेट कारोबारी कहते हैं कि ऐसे प्रोजेक्ट्स की आसपास की ज़मीनों की क़ीमत बढ़ना पहले से तय था. इस कारण से मुनाफ़ा पाने के लिए यहां निवेश को फ़ायदेमंद माना गया."

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