आइसलैंड: ज्वालामुखी विस्फोट का लावा कस्बे तक पहुंचा, आपातकाल लागू

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आइसलैंड के दक्षिणी हिस्से में ज्वालामुखी फटने के बाद आपातकाल की घोषणा की गई है. इस यूरोपीय देश के रेकजेन्स प्रायद्वीप में बीते साल दिसंबर के बाद यह चौथा ज्वालामुखी विस्फोट है.

इसे अब तक का सबसे ताकतवर विस्फोट बताया जा रहा है.

स्थानीय मीडिया का कहना है कि लावा, पास के खाली करवाए गए ग्रिंडाविक क़स्बे के क़रीब पहुंच गया है.

पास ही पर्यटकों की पसंदीदा जगह ब्लू लगून के पास मौजूद लोगों को भी हटाकर सुरक्षित जगह पहुंचाया गया है.

ज्वालामुखी से लावा और साथ में धुएं का बड़ा गुब्बार भी निकल रहा है. हालांकि, आइसलैंड के एयरस्पेस को हवाई यात्राओं के लिए खुला रखा गया है.

ग्रिंडाविक के उत्तर पूर्व में बने मुख्य अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर भी ज्वालामुखी विस्फोट का कोई असर नहीं पड़ा है.

ज्वालामुखी

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इमेज कैप्शन, ताज़ा ज्वालामुखी विस्फोट के बाद रेकजैविक शहर के आसमान का बदला हुआ रंग

आइसलैंड की नागरिक सुरक्षा सेवा के मुताबिक़, स्थानीय समय के अनुसार शनिवार रात आठ बजे ग्रिंडाविक के उत्तर में ज्वालामुखी फटा.

ये वही जगह है, जहां आठ दिसंबर को भी ज्वालमुखी विस्फोट हुआ था.

धमाके के वीडियो में ज़मीन में पड़े गड्ढों से खौलता हुआ लावा और उससे उठता धुआं देखा जा सकता है.

भूवैज्ञानिक मैग्नस टूम गुडमंडसन ने ताज़ा ज्वालामुखी विस्फोट वाली जगह का हेलिकॉप्टर से मुआयना किया है. उन्होंने मीडिया को बताया कि शनिवार को हुआ विस्फोट अब तक का सबसे ताक़तवर विस्फोट था.

कितने गंभीर हैं हालात

ब्लू लगून

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इमेज कैप्शन, ब्लू लगून आइसलैंड का सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, अब यहां भी लावा पहुंच सकता है (फ़ाइल फ़ोटो)

ज्वालामुखी से निकल रहा लावा दो धाराओं में अलग-अलग दिशाओं में बह रहा है. एक धारा पश्चिम की ओर बह रही है और दूसरी दक्षिण की ओर.

स्थानीय मीडिया का कहना है कि दक्षिण की ओर बह रहा लावा ग्रिंडाविक की पूर्वी सुरक्षा दीवारों तक पहुंच गया है.

वैज्ञानिक गुडमंडसन ने कहा कि ये भी संभव है कि लावा समंदर में चला जाए लेकिन ज्वालमुखी के अंदर चल रहा घटनाक्रम अगर शांत हो गया तो ऐसा नहीं हो पाएगा.

नॉर्वे की मौसम एजेंसी में प्राकृतिक आपदा विशेषज्ञ एइनार बेस्सी गेस्टसन ने आइसलैंड के सरकारी प्रसारस आरयूवी से कहा है कि अगर लावा समंदर के पानी के संपर्क में आएगा तो हानिकारिक गैसें निकल सकती हैं और छोटे-छोटे धमाके हो सकते हैं.

इस बीच, पश्चिम की ओर बह रहा लावा सीधे ब्लू लगून और एक जियोथर्मल पावर प्लांट की ओर बह रहा है. इस प्लांट से रेकजेन्स प्रायद्वीप के ज़्यादातर हिस्से में गर्म पानी की आपूर्ति की जाती है.

फरवरी में भी लावा इसी दिशा में बह रहा था, मगर आइसलैंड के मौसम विभाग का कहना है कि फरवरी के मुक़ाबले इस बार लावा काफ़ी बड़े इलाक़े में फैला हुआ है.

ठप हो सकता है इंटरनेट

वीडियो कैप्शन, आइसलैंड में बार-बार क्यों फटता है ज्वालामुखी?

आइसलैंड की राजधानी रेकजैविक के नॉर्डिक वॉल्कैनोलॉजिकल सेंटर के प्रमुख रिकी पेडरसन ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया है कि लावा रोकने के लिए सुरक्षात्मक दीवारें बनाई गई है.

आशंका जताई जा रही है कि गर्मी के कारण फ़ाइबर ऑप्टिकल केबल ख़राब हो सकती हैं जिससे फ़ोन और इंटरनेट सेवा बाधित हो सकती है.

पर्यटन स्थल ब्लू लगून को सावधानी बरतते हुए आगामी आदेशों तक बंद कर दिया गया है.

रिकी पेडरसन ने बताया कि जिस समय शनिवार को धमाका हुआ, उस वक़्त इस इलाक़े में 500 से 600 लोग मौजूद थे.

ग्रिंडाविक क़स्बे में भी पांच से 10 घर खाली करवाए गए हैं.

जनवरी में हुए विस्फोट के बाद भी लोगों को यहां से हटाया गया था. यहां लावा शहर तक आ गया था और तीन घर तबाह हो गए थे.

इसके बाद स्थिति सामान्य होने पर क़रीब 4000 लोग पिछले महीने ही घर लौटे थे. हालांकि, ज़्यादातर लोग अभी भी वापस नहीं लौटे हैं.

ज्वालामुखियों के बीच बसा देश

ज्वालामुखी

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आइसलैंड में 33 सक्रिय ज्वालामुखी हैं. यह देश मिड-एटलांटिक रेंज पर है जहां पृथ्वी की दो सबसे बड़ी टेक्टोनिक प्लेट्स मिलती हैं.

रेकजेन्स प्रायद्वीप में पिछली बार 800 साल पहले ज्वालामुखी फटे थे और उनमें कई दशकों तक विस्फोट होते रहे थे.

लेकिन अब, साल 2021 के बाद यहां ये सातवां ज्वालामुखी विस्फोट है.

वैज्ञानिकों को लगता है कि ये क्षेत्र ज्वालामुखी से जुड़ी गतिविधियों के नए दौर में प्रवेश कर रहा है. उनका मानना है कि यह दौर कई दशकों या फिर सदियों तक जारी रह सकता है.

वीडियो कैप्शन, ज्वालामुखी के मलबे से आइसलैंड में भारी तबाही हुई है.

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