रफ़ाह में किए जानलेवा हमले को नेतन्याहू ने बताया 'दुखद दुर्घटना'

इसराइली हमले के बाद रफ़ाह में शिविर कैंपों के बच्चे
इमेज कैप्शन, इसराइली हमले के बाद रफ़ाह में शिविर कैंपों से रह रहे बच्चे
    • Author, मैट मर्फी
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़
  • प्रकाशित

इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने रविवार को रफ़ाह में किए हमले को दुखद दुर्घटना बताया है.

इसराइल ने रविवार को रफ़ाह के शरणार्थी कैंप पर हमला किया था.

इस हमले में कम से कम 45 लोगों की जान गई थी.

हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेतन्याहू को लगातार आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.

नेतन्याहू ने कहा, ''रफ़ाह में हमने 10 लाख लोगों को सुरक्षित निकाला है. हमारी कोशिश होती है कि नागरिकों को नुक़सान ना पहुंचे. लेकिन एक घटना सोमवार को हुई. हम इसकी जांच कर रहे हैं और हम इससे सीखेंगे.''

नेतन्याहू ने कहा, ''किसी भी नागरिक को हुआ नुक़सान हमारे लिए त्रासदी की तरह है, हमास के लिए ये रणनीति है.''

रफ़ाह में इसराइल का किया हमला
इमेज कैप्शन, रफ़ाह में इसराइल का किया हमला

जंग रोकने पर नेतन्याहू ने क्या कहा

हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़, इसराइल के हमले में 45 लोग मारे गए हैं.

सैकड़ों लोग गंभीर रूप से झुलसे हैं, कइयों की हड्डियां टूट गई हैं और कुछ गहरे रूप से ज़ख़्मी हुए हैं.

इसराइल की संसद में नेतन्याहू ने कहा- हम वो हर संभव कोशिश करते हैं कि ग़ज़ा में नागरिकों की रक्षा की जाए.

इसराइली सेना का बचाव करते हुए नेतन्याहू ने कहा कि हमास के ख़िलाफ़ जंग में सेना की कोशिश रहती है कि जो लोग इसमें शामिल नहीं हैं, उनको नुक़सान ना पहुंचे.

इसराइल से जंग रोकने के लिए कई देशों की ओर से अपील की जा रही है.

हाल ही में अंतराष्ट्रीय अपराध अदालत यानी आईसीसी ने भी इसराइल से तुरंत युद्ध रोकने के लिए कहा था.

नेतन्याहू ने इस बारे में कहा- जब तक लक्ष्य हासिल नहीं हो जाता है, तब तक जंग रोकने का मेरा कोई इरादा नहीं है.

सात अक्तूबर को हमास ने इसराइल पर हमला किया था. इस हमले में इसराइल के 1200 लोग मारे गए थे.

जवाब में अक्तूबर से लेकर अब तक इसराइल की कार्रवाई में 34 हज़ार से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है. मारे जाने वालों में बच्चों और महिलाओं की अच्छी ख़ासी संख्या है.

ये तस्वीर इसराइल के हमले के बाद आग लगने की है
इमेज कैप्शन, ये तस्वीर इसराइल के हमले के बाद आग लगने की है

अंतरराष्ट्रीय संस्था क्या बोली

मेडिसिंस संस फ्रंटिएटर्स यानी एमएसएफ का कहना है कि उसके एक केंद्र पर कम से कम 28 लोगों के शव हमले के बाद लाए गए. इनमें महिलाएं और बच्चे भी थे.

एमएसएफ एक गै़र सरकारी अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जिसे डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के नाम से भी जाना जाता है.

इस संस्था ने अपने एक बयान में कहा कि 180 घायल फ़लस्तीनियों का उपचार किया गया है. कई गंभीर रूप से घायल हैं.

एमएसएफ ने इसराइल के उन दावों को ख़ारिज किया है, जिसमें कहा गया था कि ये हमला हमास पर निशाना लगाकर किया गया.

संस्था का कहना है कि ये हमला एक तथाकथित सुरक्षित इलाक़े के आबादी से भरे शिविर में किया गया. ये दिखाता है कि यहां इंसानी जान की क्या क़ीमत है.

रफ़ाह में हुए हमले के ख़िलाफ़ कई देशों में प्रदर्शन हो रहे हैं. ये तस्वीर बेरूत की है.

अमेरिका ने क्या कहा

अमेरिका ने सोमवार की शाम को रफ़ाह की तस्वीरों को दिल तोड़ने वाली बताया.

हालांकि अमेरिका ने कहा कि इसराइल के पास ये अधिकार है कि वो ख़ुद का बचाव करे.

अमेरिका में नेशनल सिक्योरिटी के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा, ''इसराइल को हक़ है कि वो हमास को निशाना बनाए. हम समझते हैं कि रफ़ाह में किए हमले में हमास के दो बड़े आतंकवादी मारे गए हैं, जो इसराइली नागरिकों की हत्या के लिए ज़िम्मेदार थे.''

अमेरिका ने इसराइल से एक बार फिर कहा कि इसराइल को हर वो कदम उठाना चाहिए, जिससे नागरिकों की रक्षा की जा सके.

इसराइल में बंधकों को छुड़वाने के लिए विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.
इमेज कैप्शन, इसराइल में बंधकों को छुड़वाने के लिए प्रदर्शन हो रहे हैं.

इसराइल क्या कर रहा है?

इसराइली अधिकारी सोमवार को इस हमले के बाद ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आख़िर रफ़ाह में गड़बड़ कहां हुई.

आईसीसी के फ़ैसले के बाद इसराइल पर दुनिया की नज़र है. इसराइल ये बात जानता है और वो दबाव में है.

इसराइल इस हमले को ख़ुफ़िया सूचनाओं पर आधारित बता रहा है और दो हमास चरमपंथियों के मारे जाने को गिनवा रहा है.

लेकिन इससे ये सवाल भी उठ रहा है कि आख़िर इस हमले की योजना कैसे बनाई गई कि इतनी बड़ी क्षति गुई.

इसराइली सेना के शीर्ष अधिकारी इस मामले में जांच की बात कह रहे हैं.

ऐसे में जल्द इनसे जुड़े कारणों के बारे में पता चल सकता है.

जांच में चाहे जो भी पता चले, रविवार को हुई घटना इस अभियान के लिए अहम मोड़ साबित होगी.

हालांकि नेतन्याहू जैसी बातें कह रहे हैं, उससे ऐसा लगता नहीं कि रविवार के हमले से उनकी सोच बदल जाएगी.

ज़मीन पर मौजूद इसराइली सैनिक सावधानी बरतते दिख रहे हैं.

लेकिन रविवार को जो हुआ, उससे इसराइल की छवि को और झटका लगा है.

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हमास ने सात अक्तूबर को इसराइल के 200 से ज़्यादा नागरिकों को बंधक बना लिया था. इनमें से कुछ को अब तक छोड़ा गया है और कुछ के मरने की भी जानकारी सामने आई.

इन बंधकों के परिवारों की ओर से लगातार ये कहा जा रहा है कि नेतन्याहू उनके अपनों छुड़वाने के लिए कोई डील नहीं कर पा रहे हैं.

आईसीसी ने जब इसराइल से रफ़ाह में तुरंग कार्रवाई रोकने के लिए कहा तो कई देशों ने इसका समर्थन किया था.

यूरोपीय संघ ने भी इसराइल से इस फ़ैसले को मानने के लिए कहा.

मगर आईसीसी के कहे का इसराइल पर कोई असर नहीं दिख रहा है.

इसराइल पर कई महीनों बाद रविवार को हमास ने मिसाइल हमला किया था. ये हमला तेल अवीव में किया गया था.

इसी के बाद इसराइल ने रफ़ाह में जवाबी हमला किया था.

इसराइली सेना का कहना था कि इस हमले में हमास के दो सीनियर कमांडर मारे गए थे और नागरिकों के मारे जाने की जांच की जा रही है.

मगर फ़लस्तीनी रेड क्रिसेंट का कहना है कि इस हवाई हमले को उन टेंट पर किया गया, जो ग़ज़ा के शरणार्थियों के लिए बनाया गया था.

इस हमले के वीडियो में देखा जा सकता है कि बड़ा धमाका हुआ है और उस जगह पर आग लगी हुई है.

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