कोविड से हार्ट अटैक का कनेक्शन, स्वास्थ्य मंत्री की चेतावनी पर क्या कहते हैं डॉक्टर?

मनसुख मंडाविया
इमेज कैप्शन, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया
    • Author, सुशीला सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा है कि आईसीएमआर की ओर से किए गए अध्ययन के मुताबिक़ जिन लोगों को गंभीर कोविड हुआ है उन्हें कठिन परिश्रम, दौड़ने या ज़्यादा कसरत करने से बचना चाहिए.

स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया का बयान ऐसे वक़्त आया है, जब हाल ही में गुजरात में नवरात्रि के दौरान लोगों की हार्ट अटैक से मौत की ख़बर आई.

इस संबंध में वीडियो भी वायरल हुए. नवरात्रि के दौरान ही 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र की मौत की ख़बर सामने आई थी.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा, ''आईसीएमआर ने हाल ही में इस पर विस्तृत अध्ययन किया है. इस अध्ययन में कहा गया है कि जिन्हें गंभीर कोविड हुआ है और ज़्यादा लंबा समय नहीं हुआ है उन्हें हार्ट अटैक से बचने के लिए कम से कम एक या दो साल तक ज़्यादा कठिन परिश्रम, ओवर वर्कआउट, भागना या ज़्यादा कसरत से बचना चाहिए.''

इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एक कार्यक्रम के दौरान भी इसकी चर्चा की थी.

उन्होंने कहा था , ''कोविड के बाद हम अचानक हार्ट अटैक से हुई मौत के मामले देख रहे हैं. आईसीएमआर ने अध्ययन शुरू कर दिया है. वैक्सीनेशन और को-मॉर्बिडिटी का डेटा हमारे पास है.''

साथ ही उन्होंने कहा था कि इस बारे में रिपोर्ट भी आएगी.

आईसीएमआर में डॉ एना डोगरा ने बीबीसी हिंदी को बताया, ''आईसीएमआर ने अपनी अध्ययन रिपोर्ट पीयर रिव्यू यानी विशेषज्ञों को समीक्षा के लिए दे दी है. समीक्षा पूरी होने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय इसके बारे में जानकारी देगा.''

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आईसीएमआर की रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है, लेकिन इससे पहले कोरोना और शरीर पर होने वाले प्रभाव को लेकर दिल्ली स्थिति जीबी पंत अस्पताल में शोध किया गया था.

साल 2020 से 2021 में 135 लोगों पर किए गए इस अध्ययन में ये पाया गया कि दिल पर इसका असर हुआ.

शोध में शामिल लोगों को लगातार निगरानी में रखा गया और देखा गया कि कोरोना का असर दिल पर कम होता गया.

इसी शोध में शामिल एक डॉक्टर ने बीबीसी को बताया, ''हमारे शोध में कोरोना से दिल पर असर होने की बात सामने आई. कोविड एक व्यक्ति के हार्ट के इलैक्ट्रिकल सिस्टम, हार्ट की पंपिग मसल और हार्ट की धमनियों जो ख़ून का संचार करती है, उस पर असर डालता है.''

वे बताते हैं कि जिन लोगों को गंभीर कोविड हुआ उन्हें ये सलाह दी गई वे ज़्यादा परिश्रम न करें क्योंकि इससे उनके दिल पर असर हो सकता था. इसलिए उन्हें कठिन परिश्रम या कसरत नहीं करने को कहा गया.

वे बताते हैं कि अध्ययन में ये भी पाया गया कि कोविड होने वाले मरीज़ में हार्ट अटैक होने की आशंका बढ़ गई थी.

लेकिन वे बात को स्पष्ट करते हुए कहते हैं, "जिन लोगों को कोविड हुआ उन्हें हार्ट अटैक होगा ही इस पर सवाल उठाया जा सकता है क्योंकि इस पर जब तक बड़े स्तर पर अध्ययन नहीं होता और नतीजा सामने नहीं आता है तब तक सटीक तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है."

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साथ ही डॉक्टर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के बयान को संतुलित और सही बताते हैं.

वे कहते हैं जिन लोगों को सीवियर या गंभीर कोविड हुआ है वो ज़्यादा या कठिन परिश्रम करते हैं तो दिल पर ज़्यादा दबाव पड़ सकता है. इससे दिल की धड़कने सामान्य से बहुत तेज़ हो सकती हैं

उनके अनुसार, ''जिन मरीज़ों को गंभीर कोविड से ठीक हुए ज़्यादा समय नहीं हुआ है उन्हें धीरे-धीरे कसरत शुरू करनी चाहिए और अचानक तेज़ी से कसरत करने की शुरुआत कतई नहीं करनी चाहिए."

कोविड के दौरान लोगों को वैक्सीन लेने की सलाह दी गई.

लेकिन बाद में ये आशंका भी जताई गई कि कोविशील्ड और कोवैक्सीन लेने के बाद हार्ट अटैक हो सकता है. इस मुद्दे पर चर्चा भी तेज़ होने लगी थी.

लेकिन जीबी पंत के अध्ययन में ये बात भी सामने आई कि जिन लोगों को वैक्सीन लगा उनमें हार्ट अटैक के कोई ज़्यादा मामले सामने नहीं आए हैं.

डॉक्टरों का कहना है कि ऐसा नहीं है कि कोविड वैक्सीन लेने के बाद हार्ट अटैक के मामले अधिक हुए हैं.

युवाओं में क्या पहले भी हार्ट अटैक के मामले सामने आते थे?

हार्ट अटैक

नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ ओपी यादव कहते हैं, ''पिछले दो या तीन दशक पहले देखें, तो क़रीब 10 प्रतिशत हार्ट अटैक ऐसे लोगों में होते थे जो 40 से कम उम्र के होते थे. इतना ही नहीं बॉयपास सर्जरी भी दस प्रतिशत, 40 साल से कम उम्र के लोगों पर की जा रही थी.''

डॉ ओपी यादव कहना है कि युवाओं में पहले भी हार्ट अटैक के मामले सामने आ रहे थे लेकिन कुछ सेलिब्रिटी लोगों की हार्ट अटैक से मौत होने की ख़बरे सामने आने के बाद ये चर्चा होने लगी कि युवाओं में हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं.

डॉ ओपी यादव सवाल उठाते हुए कहते हैं, ''क्या हमने ये देखा कि जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक आया उसे कोई को-मॉर्बिडिटी जैसे - डायबीटिज़, हाइपरटेंशन, मोटापा जैसी कोई समस्या थी. उसका लिपिड प्रोफ़ाइल क्या था?

वे कहते है कि जब भी ऐसी मौत होती है तो इस बात का आकलन भी किया जाना चाहिए क्योंकि ये देखा गया है हार्ट अटैक के मामले की ऑटोप्सी भी नहीं होती.

कोरोना के बाद क्यों सख़्त कसरत न करने की सलाह देते हैं डॉक्टर?

कसरत

दोनों ही डॉक्टर सलाह देते हैं कि अगर कोई व्यक्ति गंभीर कोविड से ठीक हुए हैं तो उन्हें तुरंत कठिन करसत और ऐसी सख़्त कसरत नहीं करनी चाहिए जो वो पहले नहीं करते थे.

डॉ ओपी यादव कहते हैं, ''कोविड की वजह से आपका ख़ून थिक या गाढ़ा हो जाता है जिसके क्लॉट या थक्के बन जाते हैं. हार्ट अटैक कोलेस्टरॉल के जमने से नहीं होता क्योंकि वो धीरे-धीरे कई सालों में जमता है. लेकिन जब उसका सरफेस रप्चर होता है और इससे बह रहा ख़ून वहाँ जमने लगता है और ऐसा होने में ज़्यादा समय नहीं लगता. जिससे क्लॉट बन जाते है और इसकी वजह से हार्ट अटैक आ जाता है.''

इसलिए कोविड के दौरान भी ख़ून को पतला करने के लिए दवा दी जा रही थीं. अगर ये दिल में क्लॉट बने तो हार्ट अटैक आ सकता है, वहीं मस्तिष्क में जम जाए तो स्ट्रोक आ जाता है.

ऐसे ही शरीर के अलग-अलग अंग में क्लॉट बनने का असर होता है.

दोनों ही डॉक्टरों का कहना है कि जिन्हें गंभीर कोरोना होना था और को-मॉर्बिडिटी है, उन्हें कोरोना से ठीक होने के एक-डेढ़ साल पूरे होने पर कसरत धीरे-धीरे ही शुरू करनी चाहिए.

डॉक्टर सलाह देते हैं-

  • अगर आप पहले दिन 200 मीटर चल रहे हैं तो कुछ दिन बाद 400 मीटर चले और ऐसे अपनी गति धीरे-धीरे बढ़ाएँ.
  • सख़्त और कठिन कसरत कतई न करें.
  • अगर आपको लगता है कि पहले जिस काम या कसरत से आपकी साँस नहीं फूलती थी लेकिन अब उसमें बदलाव देख रहे हैं तो डॉक्टर को बताएँ,
  • आँखों के सामने अंधेरा छाना
  • चक्कर आना
  • साँस लेने में दिक़्क़त
  • छाती में दर्द

अगर दिल की धड़कन तेज़ जाए जो आमतौर पर नहीं होता थी, ये सब लक्षण कोरोना से ठीक होने के बाद दिखे तो डॉक्टर को ज़रूर दिखाएँ.

डॉक्टरों का कहना है कि जो भी मरीज़ कोरोना से ठीक हुए हो और किसी भी उम्र के हों, कसरत ज़रूर करें लेकिन उसका स्तर धीरे-धीरे बढ़ाएँ.

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