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जंग की बड़ी कीमत चुकाते ग़ज़ा के बच्चे
ग़ज़ा में संघर्ष विराम न होने की वजह से हालात दिन ब दिन बिगड़ते जा रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि ग़ज़ा में बच्चे उस जंग की भारी कीमत चुका रहे हैं...जिसे शुरू करने में उनका कोई क़सूर नहीं है.
बच्चों के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी का कहना है कि यहां रहने वाले तक़रीबन दस लाख बच्चों की मानसिक सेहत पर असर पड़ा है और उनकी देखभाल करना ज़रूरी है.
वहीं ग़ज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इस संघर्ष में अब तक 14,000 से ज़्यादा बच्चे मारे जा चुके हैं.
इसराइल बीबीसी और दूसरे अंतरराष्ट्रीय मीडिया को ग़ज़ा के अंदर अकेले जाने और रिपोर्ट करने करने की इजाज़त नहीं देता.
फिर भी ग़ज़ा में ली गई एक छोटी बच्ची की तस्वीर के पीछे की कहानी पता की बीबीसी संवाददाता फ़र्गल कीन ने.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित