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जमुई यौन हिंसा जैसा वीडियो अगर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं तो हो जाएं सावधान
बिहार पुलिस की एडीजी लॉ एंड ऑर्डर केएस अनुपम ने जमुई यौन हिंसा मामले में मुख्य अभियुक्त नंदन यादव की गिरफ़्तारी की पुष्टि की है.
उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया है कि इस मामले में एसआईटी गठित हुई है जिसमें स्पीडी ट्रायल के लिए जल्द ही चार्जशीट दाख़िल की जाएगी.
वहीं जमुई के एसपी विश्वजीत दयाल ने बताया है कि इस मामल में मुख्य अभियुक्त समेत कुल पांच लोगों की गिरफ़्तारी हुई है और वीडियो शेयर करने को लेकर तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है.
साथ ही एडीजी लॉ एंड ऑर्डर केएस अनुपम ने बताया है कि जिन्होंने भी नाबालिग बच्चों का यौन हिंसा का वीडियो वायरल किया है, उनके ख़िलाफ़ प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रन फ़्रॉम सेक्शुअल ऑफ़ेंसेस (पॉक्सो) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है.
उन्होंने कहा कि पॉक्सो एक्ट के तहत बच्चों के इस तरह का वीडियो बनाना और सर्कुलेट करना ग़ैर-ज़मानती अपराध है और जिन्होंने भी इसे शेयर किया है उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी.
मुख्य अभियुक्त नंदन यादव को मुठभेड़ के बाद गिरफ़्तार किया गया है.
केएस अनुपम ने मुठभेड़ के सवाल पर समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि मुख्य अभियुक्त के पास कट्टा था और उसने पहले गोली चलाई थी, जिसके बाद पुलिस को गोली चलानी पड़ी.
वीडियो शेयर करने वालों पर भी एफ़आईआर
सोमवार को बिहार के जमुई ज़िले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुआ जिसमें एक भीड़ दो नाबालिगों को बीच सड़क पर घेरकर उनके साथ हिंसा और यौन उत्पीड़न कर रही है.
पुलिस ने इस मामले में साफ़ कहा है कि इस मामले के अभियुक्तों के साथ-साथ उनके ख़िलाफ़ भी एक्शन होगा जिन्होंने इस वीडियो को बनाया और सोशल मीडिया पर शेयर किया है.
तो अगर आपके सोशल मीडिया फ़ीड में भी जमुई का वीडियो आया है और आपने भी शेयर किया है तो सावधान हो जाइए. उस पोस्ट को डिलीट कीजिए और आगे से ऐसी किसी भी वीडियो को शेयर करने से पहले सोच लें कि पुलिस कार्रवाई भी हो सकती है.
जमुई पुलिस ने पहचान सार्वजनिक न होने का हवाला देते हुए नाबालिग सर्वाइवर से संबंधित वीडियो को पोस्ट, शेयर या फॉरवर्ड ना करने की अपील की है.
जमुई पुलिस ने अपनी एक्स पोस्ट में कहा है, "नाबालिग की पहचान उजागर करने का मामला भारतीय न्याय संहिता 2023, आईटी एक्ट 2000 और जेजे (जुवेनाइल जस्टिस) एक्ट समेत पॉक्सो के तहत आपराधिक श्रेणी में आएगा. ऐसा करने वालों पर सख्त सज़ा का प्रावधान है."
जमुई पुलिस ने यौन हिंसा मामले में बीएनएस की धारा 74 (महिला की मर्यादा भंग करना), 76/3(5) (महिला को निर्वस्त्र करना) और पॉक्सो की धारा 08/12 (बच्चों के यौन उत्पीड़न) के तहत एफ़आईआर दर्ज की है.
वहीं जमुई पुलिस के एसपी विश्वजीत दयाल ने बयान में कहा कि सोशल मीडिया पर जो वायरल वीडियो किया जा रहा है वो पॉक्सो एक्ट की धारा 23, आईटी एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 74 के तहत अपराध है.
उन्होंने कहा, "इसी के तहत साइबर थाने में 120 सोशल मीडिया अकाउंट्स यूज़र्स पर एफ़आईआर दर्ज की गई है. सभी से अपील है कि नाबालिग पीड़िता की निजता का ध्यान रखें और ऐसे वीडियो को वायरल न करें."
पॉक्सो की धारा 23 क्या है?
जमुई का मामला नाबालिग से जुड़ा है तो इस मामले के वीडियो सार्वजनिक करने को लेकर पॉक्सो एक्ट के सेक्शन 23 के तहत मामला दर्ज किया गया है.
इस सेक्शन के तहत नाबालिग़ और उसके माता-पिता की पहचान ज़ाहिर नहीं की जा सकती. उल्लंघन करने पर पॉक्सो एक्ट के सेक्शन 23 के तहत सज़ा का प्रावधान है.
अब इस कानून के बारे में जान लेते हैं.
साल 2012 के पॉक्सो एक्ट के सेक्शन 23 के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति किसी भी मीडिया, स्टूडियो या फ़ोटोग्राफ़ी सुविधा के ज़रिए किसी बच्चे के बारे में ऐसी कोई रिपोर्ट या टिप्पणी नहीं करेगा जिससे उसकी प्रतिष्ठा को नुक़सान पहुंचे या उसकी निजता का उल्लंघन हो, जब तक कि उसके पास पूरी और सही जानकारी न हो.
किसी भी मीडिया में ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं दी जाएगी जिससे बच्चे की पहचान ज़ाहिर हो, जैसे उसका नाम, पता, फ़ोटो, परिवार की जानकारी, स्कूल, आस-पड़ोस या कोई दूसरी इनफ़ॉर्मेशन... जिससे बच्चे की पहचान का पता चल सके. बशर्ते लिखित कारणों के आधार पर, इस क़ानून के तहत मामले की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत ऐसी जानकारी ज़ाहिर करने की अनुमति दे सकती है, वो भी तब जब अदालत की राय में ऐसा करना बच्चे के हित में हो.
मीडिया, स्टूडियो या फ़ोटोग्राफ़ी सुविधा के प्रकाशक या मालिक अपने कर्मचारी के कामों और चूक के लिए संयुक्त रूप से और अलग-अलग रूप से ज़िम्मेदार होंगे.
जो कोई भी व्यक्ति सेक्शन 23 के सब सेक्शन (1) या सब सेक्शन(2) के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, उसे छह महीने से एक साल तक की जेल की सज़ा, या जुर्माना, या दोनों सज़ाएं दी जा सकती हैं.
वहीं जेजे एक्ट की धारा 74 उन बच्चों की पहचान की गोपनीयता और उनके स्वाभिमान की सुरक्षा से संबंधित है, जिन्होंने अपराध किया हो, जिन्हें संरक्षण की आवश्यकता हो, जो पीड़ित हो या गवाह हो.
यह धारा किसी भी मामले में शामिल बच्चों की व्यक्तिगत जानकारी को सार्वजनिक करने पर पूरी तरह से रोक लगाती है.
इसके उल्लंघन पर छह महीने तक की जेल की सज़ा और दो लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.
पुलिस की सख्ती
इस मामले पर राजनीतिक बयान आ रहे हैं. इस पर बिहार और देश के राजनेताओं से लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग सक्रिय हुआ है.
जमुई पुलिस ने कई बार कहा है कि वो सोशल मीडिया से इस वीडियो को हटाने की कोशिश कर रही है और उसकी कोशिश है कि वीडियो दोबारा किसी दूसरे अकाउंट से अपलोड या शेयर न किया जाए.
पुलिस का कहना है कि वीडियो को वायरल करने और प्रसारित करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी जांच की जा रही है. पुलिस के मुताबिक़, क़ानून के तहत जिन लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.
वहीं बिहार की एडीजी लॉ एंड ऑर्डर केएस अनुपम ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें उन्होंने कहा कि अगर कोई वायरल वीडियो में लड़की का चेहरा ब्लर किए बगैर शेयर किया तो पॉक्सो के तहत केस दर्ज किया जाएगा.
पुलिस ने कई अकाउंट्स की पहचान की है और टेकडाउन नोटिस भी भेजा है.
जमुई में क्या हुआ था?
जमुई एसपी विश्वजीत दयाल ने सोमवार को मीडिया को बताया था कि वायरल वीडियो 19 सितंबर की शाम सात बजे का है.
वायरल वीडियो में नाबालिग़ छात्र-छात्रा एक स्कूटर पर बैठे हुए हैं और युवकों की भीड़ ने उन्हें घेर रखा है.
इसी दौरान छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न किया जा रहा है. वहीं छात्र युवकों के समूह से छात्रा को बचाने की कोशिश कर रहा है.
बिहार पुलिस की एडीजी लॉ एंड ऑर्डर केएस अनुपम ने इस मामले में कहा है कि "नाबालिग लड़की अपने दोस्त के साथ फ़ोटो खींचने गई थी, उस गांव में रहने वाले कुछ लोगों ने लड़की के साथ छेड़खानी की है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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