ईरान पर इसराइल के हमले के बारे में सैटेलाइट तस्वीरों से क्या पता चलता है? - बीबीसी वेरिफ़ाई

परचिन सैन्य अड्डा
    • Author, बेनेडिक्ट गारमैन और शायन सरदारीज़ादेह
    • पदनाम, बीबीसी वेरिफाई
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

पिछले सप्ताह इसराइल ने अचानक ईरान के कुछ सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले कर दिए थे.

इसराइल की ओर से कहा गया था कि उसने ईरान के मिसाइल संयंत्रों पर हमले किए हैं.

इसराइल का कहना था कि ईरान ने हाल में उस पर जो हमले किए थे उनमें इन्हीं मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया था.

बीबीसी वेरिफ़ाई ने जिन सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण किया है उनसे पता चलता है कि पिछले शनिवार को इसराइल के हवाई हमले में ईरान के कई सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा है.

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विशेषज्ञों का कहना है कि इनमें वे ठिकाने भी शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल मिसाइल और एयर डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए किया जा रहा था.

इनमें से एक का संबंध ईरान के परमाणु कार्यक्रम से रहा था.

परचिन सैन्य अड्डा

इसराइली हमले के बाद की सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाया गया है कि एक बड़ी बिल्डिंग को नुकसान पहुंचा है.

विशेषज्ञों का कहना है कि यह परचिन स्थित एक बड़ा हथियार विकास और उत्पादन संयंत्र है. यह तेहरान से 30 किलोमीटर पूर्व में मौजूद है.

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटजिक स्टडीज के विशेषज्ञों का कहना है कि यह बिल्डिंग ईरान में रॉकेट मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी है.

9 सितंबर और 27 अक्तूबर की सैटेलाइट तस्वीरों की तुलना से पता चलता है कि ऐसा लगता है कि यहां चार भवनों को ख़ासा नुक़सान पहुंचा है.

इनमें से एक बिल्डिंग तालेगन 2 के नाम से जानी जाती है. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने इसका संबंध ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जोड़ा था.

2016 में आईएईए को यहां परमाणु कण मिले थे. इसके बाद ये सवाल उठाए गए कि जब ईरान में परमाणु गतिविधियों पर प्रतिबंध लग चुके हैं तो परमाणु कण कहां से आए.

ख़ोजिर सैन्य बेस

इसराइली हमले का निशाना ख़ोजिर भी था जो पारचिन से 20 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है.

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटजिक स्टडीज के विशेषज्ञ फेबियन हिंज़ ने बताया, ‘’ ख़ोजिर ऐसी जगह है जहां बैलिस्टिक मिसाइलों से जुड़े सघन इन्फ्रास्ट्रक्चर हैं.’’

2020 में यहां रहस्यमयी विस्फोट हुए थे. ये विस्फोट काफी बड़े थे.

सैटेलाइट तस्वीरों से ऐसा लगता है कि इस परिसर की दो इमारतों को काफी ज़्यादा नुक़सान पहुंचा है.

शहरोद बेस

सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि तेहरान से 350 किलोमीटर पूर्व में स्थित शहरोद के भी एक सैन्य अड्डे को हमले में नुक़सान पहुंचा है.

फेबियन हिंज़ ने बताया कि सेमनान प्रांत स्थित ये इलाका ईरान के लिए काफी अहम है क्योंकि यहां लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों के पुर्जे बनते रहे हैं.

सामने ही शहरोद स्पेस सेंटर हैं. इसका नियंत्रण रेवोल्यूशनरी गार्ड कोर के पास है. यहीं से 2020 में ईरान ने एक मिलिट्री सैटेलाइट लॉन्च की थी.

नखजिर रडार केंद्र

इसराइल ने दावा किया है कि इसने ईरान के कई ठिकानों पर मौजूद एयर डिफेंस पर सफल हमले किए हैं. लेकिन जो सैटेलाइट तस्वीरें उपलब्ध हैं उनसे इसकी पुष्टि करना मुश्किल है.

हमारे पास जो सैटेलाइट तस्वीर है उससे ऐसा लगता है कि यहां भी एक बिल्डिंग को नुक़सान पहुंचा है. विशेषज्ञों ने इसे एक रडार केंद्र बताया है.

यह शाह नख़जिर के पहाड़ों पर मौजूद है. ये पश्चिमी ईरान के इलम शहर के पास मौजूद है.

डिफेंस इंटेलिजेंस कंपनी के मध्यपूर्व विशेषज्ञ जेरेमी बिनी का कहना है कि यह नया विकसित रडार डिफेंस सिस्टम हो सकता है.

ये जगह दशकों पहले बनाई गई थी. लेकिन ओपन सोर्स एक्सपर्ट्स की ओर से जिन सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण किया गया है, वो बताती हैं कि यहां हाल के सालों में काफी रिनोवेशन का काम हुआ है.

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हमने अबादान ऑयल रिफाइनरी की एक स्टोरेज यूनिट की भी पहचान की है. लगता है इसे भी नुक़सान पहुंचा है. ये रिफाइनरी दक्षिणी पश्चिमी प्रांत खुज़ेस्तान में मौजूद है.

हालांकि हमें ये नहीं पता है इस केंद्र में ये नुक़सान कैसे हुआ है. लेकिन लगता है कि पूरे ईरान में मलबों या मिसाइल डिफेंस सिस्टम की मिस फायरिंग से ऐसे नुकसान हुए होंगे.

न्यूयॉर्क टाइम्स ने इसराइली अधिकारियों के हवाले से कहा है कि शनिवार की सुबह किए गए उसके हमलों के लक्ष्यों में से अबादान ऑयल रिफाइनरी भी शामिल थी.

शनिवार को ही ईरानी अधिकारियों ने भी इस बात की पुष्टि की थी ख़ुजेस्तान पर भी इसराइल ने हमला किया था.

अबादान ऑयल रिफाइनरी देश की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी है. इसके सीईओ के मुताबिक़ यहां हर दिन पांच लाख बैरल तेल का उत्पादन होता है.

सैटेलाइट तस्वीरों से अंतिम तौर पर ये नहीं कहा जा सकता किस इमारत को नुक़सान पहुंचा है.

मिसाल के तौर पर हमने हज़रत अमीर ब्रिगे़ड एयर डिफेंस बेस के नज़दीक धुआं उठने की शिनाख़्त की थी.

ऐसा लग रहा था कि उस पर हमला हुआ है. लेकिन रविवार को जो सैटेलाइट तस्वीरें मिलीं उन पर काफी ज्यादा छाया पड़ी हुई थी.

इससे ये पता करना मुश्किल था कि हमले में इस जगह को कितना नुक़सान पहुंचा है.

इसराइली हमले के बाद भी तेहरान में लोगों की रोज़ाना की ज़िंदगी आम दिनों की तरह चल रही है
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ईरान ने 1 अक्टूबर को इसराइल पर मिसाइलों से हमला किया था. इस हमले में 200 मिसाइलें दागी गई थीं.

ये इस साल किया गया दूसरा हमला था. इससे पहले अप्रैल में ईरान ने इसराइल पर 300 मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया था.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित

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