जॉगर्स से पता चला था बेनज़ीर भुट्टो पर आत्मघाती हमला करने वाले का

बेनज़ीर भुट्टो
इमेज कैप्शन, बेनज़ीर भुट्टो पर आत्मघाती हमला करने वाला पंद्रह साल का बिलाल था
    • Author, रियाज़ सोहैल
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू डॉट कॉम, कराची
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 11 मिनट

पंद्रह साल के बिलाल को उसके साथी ने राय दी थी कि वह अपने जॉगर्स उतार ले क्योंकि क़ानून लागू करने वाली संस्थाओं को पता है कि जिहादी इस स्टाइल के जूते इस्तेमाल करते हैं. बिलाल उर्फ़ सईद ने अपने साथी की बात मान ली और सैंडल पहन लिए जिसके बाद वह अपने 'मिशन' पर रवाना हो गए.

लेकिन बाद में होने वाली तफ़्तीश के दौरान बिलाल के शरीर के टुकड़ों का उन जॉगर्स से मिलने वाले नमूनों से मिलान किया गया तो साबित हुआ कि बेनज़ीर भुट्टो पर आत्मघाती हमला करने वाला पंद्रह साल का बिलाल ही था.

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की चेयरपर्सन और पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो स्वनिर्वासन के बाद 18 अक्टूबर 2007 को देश वापस लौटी थीं. इस मौक़े पर उनके लिए कराची में आयोजित स्वागत समारोह पर हमला किया गया था.

इसके बाद 27 दिसंबर को रावलपिंडी में लियाक़त बाग़ की सभा के बाद उन पर हमला हुआ जिसमें बेनज़ीर समेत 24 लोग मारे गए और सैकड़ों लोग घायल हो गए थे. उनकी मौत की तफ़्तीश जेआईटी, स्कॉटलैंड यार्ड और संयुक्त राष्ट्र के कमीशन ने की थी.

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नारंगी रंग का शोला भड़का

पाकिस्तान की पूर्व पीेएम बेनज़ीर भुट्टो
इमेज कैप्शन, पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो स्वनिर्वासन के बाद 18 अक्टूबर 2007 को देश वापस लौटी थीं

लियाक़त बाग़ में सभा ख़त्म हो चुकी थी. बेनजीर भुट्टो सभा स्थल से निकलने के लिए बुलेट प्रूफ़ लैंड क्रूज़र में सवार हुईं जो दुबई में ख़ासतौर पर तैयार की गई थी. इसी दौरान लोगों ने 'जिये भुट्टो' के नारे लगाने शुरू कर दिए. कार्यकर्ताओं के प्यार और नारों का जवाब देने के लिए बेनज़ीर की गाड़ी की छत खोली गई जहां से सिर निकाल कर उन्होंने नारों का जवाब देना शुरू किया.

स्कॉटलैंड यार्ड ने घटना के दिन के कई वीडियो का मुआयना किया था और उनकी रिपोर्ट के अनुसार- इस दौरान पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का एक कार्यकर्ता गाड़ी पर चढ़ गया और बेनज़ीर भुट्टो को छूने की कोशिश की जिसको सुरक्षा बलों ने ज़बर्दस्ती उतारा.

थोड़े समय के लिए हुई उस हलचल के तुरंत बाद काले बालों वाला एक शख़्स, जिसने धूप में लगाने वाला चश्मा लगा रखा था, गाड़ी की तरफ़ बढ़ने लगा और बेनज़ीर की लैंड क्रूज़र के पास आ गया. कुछ ही पलों में उसने दोबारा अपनी जगह बदल ली और भीड़ में उस तरफ़ चला गया जहां कम लोग मौजूद थे.

लैंड क्रूज़र के अगले और पिछले दरवाज़े के बीच पहुंचकर उसने काले रंग की गन निकाली और दाएं हाथ में थाम ली. लगभग दो से तीन फ़ीट की दूरी पर उसने बंदूक़ ऊपर की और बेनज़ीर पर निशाना साधकर लगातार तीन फ़ायर किए. हर गोली के बाद हमलावर ने बंदूक़ का रुख़ थोड़ा बदल दिया. तीसरी गोली फ़ायर किए जाने से पहले तक बेनज़ीर गाड़ी के ऊपर नज़र आ रही थीं.

गोलियां दागने के बाद हमलावर ने नीचे ज़मीन की तरफ़ देखा और अपनी बांह पर बटन दबाया. उस समय नारंगी शोले के साथ धमाका हुआ और काला धुआं फैल गया.

मेहंदी वाले हाथ और सैंडल

बेनज़ीर भुट्टो
इमेज कैप्शन, बेनज़ीर भुट्टो की तस्वीर उनके समर्थक लिए हुए

बेनज़ीर भुट्टो की हत्या की तहक़ीक़ात के लिए बनाई गई जॉइंट इन्वेस्टिगेशन टीम की रिपोर्ट के अनुसार आत्मघाती हमलावर का सिर धमाके की जगह से 25 फ़ुट की दूरी पर मिला जो पार्क में अंदर आने के रास्ते के पास फ़ुटपाथ के पास पर पड़ा हुआ था. एक मेहंदी लगा हाथ उसके सिर के पास से मिला और दूसरा मेहंदी लगा बायां हाथ पास के एक घर के सामने से मिला.

पुलिस के एक सीनियर अधिकारी के अनुसार इस तरह के हमले ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह में देखे गए थे. "उन हमलावरों की समझ होती है कि चूंकि हूरों से मिलने जा रहे हैं इसलिए साफ़ सुथरे होकर और दूल्हा बनकर जाएं."

पाकिस्तान में चरमपंथ और उसके रुझानों पर शोध करने वाले आमिर राना का कहना है कि ईरान में हसन बिन सबाह के जो फ़िदाइन थे उनमें भी यही सोच पाई जाती थी.

स्कॉटलैंड यार्ड की रिपोर्ट के अनुसार धमाके के केंद्र के पास दो टांगें भी मिलीं जिनमें ब्राउन रंग के सर्विस सैंडल और उसी रंग की जुराबें थीं.

पेशावर और लाड़काना में भी साज़िश

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बेनज़ीर भुट्टो की हत्या की जांच रिपोर्ट और अभियुक्तों के बयानों से मालूम होता है कि बेनज़ीर पर हमले की कई शहरों में साज़िश रची गई थी. लियाक़त बाग़ में हमले से तेरह दिन पहले नौशहरा के इलाक़े पब्बी में हमले की रिहर्सल की गई थी. मामले में गिरफ़्तार एक मुलज़िम रशीद अहमद उर्फ रहीम तुराबी ने जेआईटी को बताया था कि शुरू में पेशावर में हमले की योजना बनाई गई थी लेकिन सख़्त सुरक्षा की वजह से यह संभव नहीं हो सका.

पुलिस ने धमाके और उसकी साज़िश के आरोप में रशीद अहमद समेत पांच मुलज़िमों को गिरफ़्तार किया था जिन में एतज़ाज़ शाह उर्फ़ सैफ़ुल्लाह, शेर ज़मान, हसनैन गुल और मोहम्मद रफ़ाक़त शामिल थे.

एतज़ाज़ शाह ने जेआईटी को बताया था कि माता-पिता की इजाज़त लिए बिना वह मकीन में तालिबान के केंद्र पर गया था जहां तालिबान के केंद्रीय नेता सनाउल्लाह ने उसकी ट्रेनिंग की. इसके बाद उसे तालिबान सेंटर लदहा और उसके बाद तंगई भेजा गया जहां रोज़ा दीन (फ़िदाइन सेंटर के प्रमुख) ने उसे आत्मघाती हमले के लिए तैयार किया. यहां उसने ड्राइविंग भी सीखी.

एतज़ाज़ शाह के बयान के अनुसार रोज़ा दीन ने अक्टूबर 2007 में उसको बताया कि बेनज़ीर भुट्टो पर आत्मघाती हमला करना है और उसने इसके लिए हामी भर दी. वह स्थानीय तालिबान नेता शेर ज़मान के घर गया जहां अमजद और साबिर नाम के दो लोग मौजूद थे. उन्हें भी बेनज़ीर पर हमले के लिए तैयार किया गया था.

बेनज़ीर भुट्टो
इमेज कैप्शन, पुलिस ने धमाके और उसकी साज़िश के आरोप में रशीद अहमद समेत पांच लोगों को गिरफ़्तार किया था

27 दिसंबर की रात बीबीसी के ज़रिए उसे मालूम हुआ कि बेनज़ीर भुट्टो पर हमला कर दिया गया है जिसके बाद वह डहीला सेंटर के प्रमुख वली मोहम्मद के पास गया और पूछा कि उसे क्यों नहीं भेजा गया तो वली मोहम्मद ने बताया कि योजना के अनुसार बेनज़ीर भुट्टो के बच जाने की स्थिति में उसे भेजा जाना था.

गिरफ़्तार मुलज़िम शेर ज़मान ने अपने बयान में बताया था कि नवाज़ महसूद ने उन्हें बताया कि वह बेनज़ीर को मारने की योजना बना रहे हैं. उसे सात हज़ार रुपये दिए गए ताकि वह लाड़काना में हमले के लिए सही जगह तलाश कर सके.

एक और मुलज़िम हसनैन गुल ने जेआईटी को बताया कि मीरान शाह में ट्रेनिंग के दौरान उसका नादिर उर्फ़ क़ारी इस्माईल से संपर्क हुआ था जो अकोड़ा खटक मदरसे में रहता था. उसने नवंबर 2007 में अकोड़ा खटक का दौरा किया जहां क़ारी इस्माईल ने उसे बताया कि बेनज़ीर का ख़ात्मा करना है क्योंकि उसको अमेरिका ने मुजाहिदीन और तालिबान के ख़ात्मे के लिए पाकिस्तान भेजा है.

हसनैन के अनुसार नादिर उर्फ़ क़ारी इस्माईल, नसरुल्लाह उर्फ़ अहमद और हसनैन गुल ने चुनावी सभा में बेनज़ीर पर हमले की योजना बनाई. ईद अल-अज़हा से पांच-छह दिन पहले नसरुल्लाह रावलपिंडी आ गया जिसको वह और उसका कज़न रफ़ाक़त टैक्सी में घर लेकर आए. इसके बाद उन्होंने लियाक़त बाग़ की रेकी की और इस्लामाबाद में पार्लियामेंट और लाल मस्जिद देखने चले गए.

हमलावर बस से आए

बेनज़ीर भुट्टो
इमेज कैप्शन, सार्वजनिक सभा में बोलते हुए बेनज़ीर भुट्टो

पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री रहमान मलिक का कहना है कि हमलावर रास्ते में दो मदरसों में रहे. इसके बाद मदरसा हक़्क़ानिया अकोड़ा खटक के रूम नंबर 70 में ठहरे जहां उन्होंने कपड़े बदले.

जांच रिपोर्ट और मुलज़िमों के बयान से यह भी पता चलता है कि हमलावरों को बस से लाया गया जिसकी पुष्टि हसनैन गुल के बयान से होती है. उसने बताया कि 26 दिसंबर को नसरुल्लाह ने फ़ोन कॉल की थी और बताया था कि नसरुल्लाह उर्फ़ अहमद सईद उर्फ़ बिलाल और इकरामुल्लाह आत्मघाती हमले के लिए आ रहे हैं.

दो-तीन घंटे के बाद नसरुल्लाह ने उसको रावलपिंडी में आने की सूचना दी और वह रफ़ाक़त के साथ उन्हें लेकर उसके घर आ गया. दूसरे दिन सुबह आठ-नौ बजे नसरुल्लाह और रफ़ाक़त लियाक़त बाग़ की रेकी करने चले गए.

हमलावरों की तैयारी

हसनैन गुल ने बताया कि हमलावर सईद उर्फ़ बिलाल और इकरामुल्लाह को आत्मघाती हमले के लिए तैयार किया और उन्हें जैकेट, पिस्तौल और गोलियां दीं. सईद उर्फ़ बिलाल ने हसनैन का काला चश्मा भी पहन लिया और एक शॉल, टोपी और एक जॉगर्स का जोड़ा घर छोड़ गया.

पत्रकार ओवन बेनेट जॉन्स 'भुट्टो डायनेस्टी' में लिखते हैं कि हसनैन ने बिलाल को राय दी कि उन ट्रेनिंग जूते जॉगर्स के अलावा कुछ और पहनें क्योंकि सुरक्षा बलों को पता है कि यह जूते जिहादी पहनते हैं और हो सकता है कि वह उन जूतों की वजह से पकड़ा जाए. इस सलाह पर उसने सैंडल पहने और जॉगर्स वहां उतार दिए. इससे पहले दोनों हमलावरों ने स्नान किया.

हसनैन गुल ने अपने बयान में जेआईटी को बताया कि सईद उर्फ़ बिलाल को सभा से बेनज़ीर भुट्टो के बाहर जाने वाले रास्ते पर तैनात किया गया जबकि इकरामुल्लाह को इस निर्देश के साथ पब्लिक गेट पर लगाया गया की बिलाल की नाकामी की स्थिति में वह आत्मघाती हमला करेगा. यह भी फ़ैसला हुआ कि सभा के अंदर हमला किया जाएगा लेकिन हमलावर भीड़ की वजह से वहां तक नहीं पहुंच सके.

हसनैन के अनुसार उसने फ़ायरिंग और धमाके की आवाज़ सुनी, उसके बाद नसरुल्लाह डाइवो अड्डे की तरफ़ चला गया जबकि इकरामुलाह का पता नहीं चला. वह रफ़ाक़त के साथ घर की तरफ़ लौटा. रास्ते में उन्होंने बेनज़ीर की मौत के बारे में सुना.

जॉगर्स का डीएनए टेस्ट

बेनज़ीर भुट्टो
इमेज कैप्शन, कार्यकर्ताओं के प्यार और नारों का जवाब देने के लिए बेनज़ीर भुट्टो की गाड़ी की छत खोली गई

हसनैन के बयान पर पुलिस ने रफ़ाक़त के घर से एक शॉल, टोपी और एक जॉगर्स का जोड़ा बरामद किया.

पूर्व गृह मंत्री रहमान मलिक का कहना है कि हमलावर बिलाल जो शूज़ रफ़ाक़त के घर में छोड़ गया था उसको सरकार ने शरीर के कुछ टुकड़ों के साथ डीएनए टेस्ट के लिए अमेरिका भेजा जहां से पुष्टि हुई कि बमबार बिलाल था और जूते उसी के हैं. स्कॉटलैंड यार्ड की रिपोर्ट के अनुसार रेडियोग्राफ़र ने बमबार के हाथ के 'एक्स रे' की मदद से उम्र का पता लगाया और उसकी उम्र पंद्रह साल छह माह बताई गई.

हमलावर बिलाल के बारे में जांच रिपोर्ट और मुलज़िमों के बयानों से बहुत जानकारी नहीं मिली. कुछ सूत्रों के अनुसार उसकी पैदाईश अफ़ग़ानिस्तान की सीमा के पास हुई थी.

'फ़िरंगी राज से अमरीकी सामराज तक' में मुफ़्ती नूर वली लिखते हैं कि इस हमले में फ़िदाई इकरामुल्लाह निकलने में कामयाब हुआ जो अब तक बचा हुआ है. उसका संबंध मकीन से है और बिलाल का संबंध बदर से था. मौलवी इमरान के अनुसार इस कार्रवाई में उनकी मदद अहमद, क़ारी इस्माईल और मुल्ला एहसान ने की थी.

हमलावर इकरामुल्लाह कहां गया?

पाकिस्तान सरकार कई साल तक यह मानती रही कि इकरामुल्लाह जुलाई 2017 में एक ड्रोन हमले में मारा गया है लेकिन वह ज़िंदा था और कुर्रम एजेंसी में तालिबान का प्रमुख बन चुका था. उसका नाम बाद में वॉन्टेड लोगों की लिस्ट में शामिल कर लिया गया.

पूर्व गृह मंत्री रहमान मलिक का कहना है कि इकरामुल्लाह उस साज़िश का एक हिस्सा था. अगर बेनज़ीर भुट्टो पहले हमले में बच जातीं तो उसको धमाका करना था. धमाके के बाद वह निकल आया और मकीन में बैतुल्लाह महसूद के पास चला गया जहां बैतुल्लाह ने उसको अपने पास रख लिया.

"जब बैतुल्लाह की ड्रोन हमले में मौत हुई तो यह अफ़ग़ानिस्तान चला गया. मैंने पाकिस्तान सरकार को कई ख़त लिखे हैं कि आप अफ़ग़ानिस्तान सरकार से अनुरोध करके उसको डिपोर्ट कराएं या गिरफ़्तार करके यहां भिजवाएं क्योंकि वह उस साज़िश का जीता जागता सबूत है जिससे टूटी हुई कड़ियां मिलेंगी."

याद रहे कि जून 2018 में एक वीडियो बयान में इकरामुल्लाह ने कहा था कि हमले और उसकी तैयारी में किसी भी समय वह शामिल नहीं था और न ही उसे इस योजना की कोई जानकारी थी.

वीडियो कैप्शन, क़बीलों की लड़ाई में पिसता पाकिस्तान का ये इलाक़ा

साज़िश में शामिल मुलज़िमों की संदेहास्पद स्थिति में मौत

लियाक़त बाग़ में बेनज़ीर भुट्टो की मौत के बाद मुलज़िमों के बयानों के अनुसार इस साज़िश में शामिल नादिर उर्फ़ क़ारी इस्माईल और नसरुल्लाह उर्फ़ अहमद की संदेहास्पद स्थिति में मौत हुई.

जॉइंट इन्वेस्टिगेशन टीम को बताया गया कि नादिर उर्फ़ क़ारी इस्माईल और नसरुल्लाह उर्फ़ अहमद 15 जनवरी 2018 को एक 14-15 साल के एक लड़के को वर्दी वाली जैकेट में एक कार में सवार होकर ले जा रहे थे.

दोपहर को महमंद राइफ़ल्स की तहसील अलज़ई की चेक पोस्ट मौसूमा में खप्पर से गुज़रने लगे तो महमंद राइफ़ल्स के जवानों ने कार रोकी. इस पर नादिर ख़ान उर्फ़ क़ारी इस्माईल और नसरुल्लाह अहमद कार से निकलकर भागे.

दोनों फ़ायरिंग से घायल हुए और इस दौरान नादिर मौक़े पर मारा गया जबकि कार में मौजूद लड़के ने ख़ुद को बारूद से उड़ा लिया. नसरुल्लाह उर्फ़ अहमद बेहोशी की हालत में अस्पताल लाया गया जहां उसकी मौत हो गई.

उधर रावलपिंडी में आतंकवादी निरोधी अदालत ने अगस्त 2017 में रफ़ाक़त, हसनैन गुल, शेर ज़मान, एतज़ाज़ शाह और रशीद अहमद को बरी कर दिया था और कहा था कि अभियोजन पक्ष मुलज़िमों पर इलज़ाम साबित नहीं कर सका.

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