BBC Hindi: बीते हफ़्ते की वो ख़बरें, जो शायद आप मिस कर गए

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उम्मीद है कि आप अच्छे होंगे, खुश होंगे, बारिश और बाढ़ के बीच सुरक्षित होंगे.
हम जानते हैं कि रोज़मर्रा की आपा-धापी के बीच आपके लिए देश-दुनिया की हर ख़बर पर नज़र रखना मुश्किल होता होगा.
ऐसे में हम लाए हैं बीते सप्ताह की कुछ दिलचस्प और अहम ख़बरें, जिन पर शायद आपकी नज़र ना गई हो.
मध्य प्रदेश: देश के सबसे ग़रीब ज़िले अलीराजपुर के 'अच्छे दिन' कब आएंगे?- ग्राउंड रिपोर्ट

बजरी की उम्र 23 साल के आसपास होगी. वैसे किसी को उनकी असली उम्र का पता नहीं है. कुछ गाँव वालों का अंदाज़ा है कि वो 20 साल से ज़्यादा की नहीं होंगी.
इतनी-सी उम्र में ही वे तीन बेटियों की माँ भी बन चुकी हैं और इसमें भी कोई हैरानी नहीं है कि उनकी तीनों बेटियों का जन्म उन्हीं के सुदूर गाँव की टूटी-फूटी झोपड़ी में हुआ है.
बजरी और उनकी बेटियां भाग्यशाली थीं कि वो बच गईं, नहीं तो इन इलाक़ों में प्रसव के दौरान मृत्यु होना आम बात है. यहाँ दूर-दूर तक चिकित्सा की कोई व्यवस्था नहीं है.
बजरी, मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के उस इलाक़े में रहतीं हैं, जहाँ पहुँच पाना अपने-आप में मुश्किल काम है. कमज़ोर शरीर वाले तो यहाँ पहुँचने में बेहाल हो जाते हैं. ये इलाक़े बाक़ी के ज़िले से पूरी तरह कटे हुए हैं.
अलीराजपुर आदिवासी बहुल क्षेत्र है. यहां की आबादी में लगभग 90 प्रतिशत आदिवासी ही हैं.
दूसरे इलाक़ों की तुलना में पेरियातर और उसके जैसे आस पास के ‘फलियों’ में रहने वाले आदिवासियों की ज़िंदगियों में कोई उत्साह नहीं है. उनके सामने हर दिन एक नया संघर्ष लेकर आता है.
देश के सबसे ग़रीब ज़िले अलीराजपुर की मुश्किलें और यहां सुविधाएं पहुंचाने में आने वाली चुनौतियों को बताती ये पूरी रिपोर्ट पढ़ें यहां.
आईपीएल को क्या टक्कर दे पाएगा अमेरिका का मेजर लीग क्रिकेट?

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कई वायदों और घोषणाओं के बाद आख़िरकार अमेरिका में प्रोफ़ेशनल क्रिकेट की शुरुआत के आसार नज़र आ रहे हैं.
अमेरिका में आईपीएल की तर्ज पर मेजर लीग क्रिकेट (एमएलसी) की शुरुआत हो रही है और माना जा रहा है कि ये क्रिकेट में एक नया क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है.
कहा ये भी जा रहा है कि ये लीग आईपीएल को कड़ी टक्कर दे सकती है.
बीबीसी ने इस बहुचर्चित प्रतियोगिता के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की है.
भरा रहा है जो बिना उपस्थिति दर्ज कराए ग़ायब हो गए.
लेकिन एमएलसी पिछली घोषणाओं जैसी गति प्राप्त नहीं होना चाहेगा.
कहा जा रहा है कि इसमें खिलाड़ियों को अच्छा ख़ासा पैसा ऑफ़र किया गया.
छह टीमों में हरेक के पास खर्च करने को 11.5 लाख डॉलर राशि होती है, जिसमें वो 15 से 18 खिलाड़ी खरीद सकते हैं.
इस क्रिकेट लीग में और क्या खास है और ये आईपीएल से कितनी अलग है, पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.
भारत के आम बेहतर हैं या पाकिस्तान के?

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वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.
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आम भारत के मलीहाबाद का अच्छा है या पाकिस्तान के शहर मुल्तान का? यह सवाल अक्सर विदेश में रहने वालों के लिए 'विराट कोहली बेहतर हैं या बाबर आज़म' जैसी बहस में बदल जाता है.
दक्षिण एशिया के ये दोनों ही देश आम के लिए मशहूर हैं. दुनिया का चालीस प्रतिशत आम भारत में होता है लेकिन निर्यात के मामले में पाकिस्तान और भारत लगभग बराबर हैं.
ऐसे में फलों का राजा कहलाने वाले इस फल की खेती के बारे में भारत और पाकिस्तान दोनों में से कौन आगे है, इस बहस में पड़ने से पहले हमने दोनों देशों के किसानों से बात करके यह जानने की कोशिश की है कि उनके आम की ख़ास बात क्या है.
आमों की चाहत के लिए मशहूर शायर मिर्ज़ा ग़ालिब ने एक बार कहा था कि आमों में बस दो ख़ूबियां होनी चाहिए; एक तो वो मीठे हों और ढेर सारे हों.
लेकिन भारत के 'मैंगो मैन' कलीमुल्ला ख़ान इसमें इस जुमले का इज़ाफ़ा करते हैं, "इसकी बहुत सारी क़िस्में भी होनी चाहिए" क्योंकि मलीहाबाद में वे इसी वजह से मशहूर हैं.
दूसरी ओर, पाकिस्तान के शहर मुल्तान के किसान सोहैल ख़ान बाबर मज़ाक़ करते हुए कहते हैं कि लोग मुल्तान वालों से दोस्ती ही इसलिए करते हैं क्योंकि यहां के आम मशहूर हैं.
आइए, इन दोनों जगहों पर जानते हैं कि भारत और पाकिस्तान के आमों में क्या खास है. यहां क्लिक करें.
यमुना का जल स्तर ख़तरे के निशान से ऊपर, साल 1978 से कैसे अलग हैं दिल्ली के हालात

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दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर गुरुवार को बढ़कर 208.6 मीटर के पार पहुंच गया.
इससे पहले साल 1978 में आख़िरी बार यमुना का जलस्तर 207.49 मीटर तक पहुंचा था. तब दिल्ली में बाढ़ आ गई थी और इससे काफ़ी नुकसान हुआ था.
अभी फिलहाल दिल्ली के निचले इलाकों में पानी भर गया है और अगर जलस्तर बढ़ता जाता है तो रिहायशी इलाके भी इसकी जद में आ सकते हैं.
दिल्ली में 1924, 1977, 1978, 1995, 2010 और 2013 में बाढ़ आई थी. अब कई लोगों को डर सता रहा है कि कहीं हालात 1978 की बाढ़ जैसे तो नहीं हो जाएंगे.
दिल्ली में इस बार बाढ़ के हालातों को और बेहतर समझने के लिए पढ़ें ये कहानी.
पानी पर बसे शहर की क्या ऊंचाई बढ़ा पाना संभव है? - दुनिया जहान

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वेनिस इटली के उत्तर-पूर्व में बसा एक मध्यकालीन शहर है. यह शहर खाड़ी के पानी के बीच बसा है. इसके ख़ूबसूरत अनूठेपन से आकर्षित होकर हर साल लाखों पर्यटक आते हैं और यह इटली का एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी है.
देखने से लगता है जैसे यह शहर पानी में तैर रहा हो. मगर एड्रियाटिक सागर के पास बसे, इटली के इस शहर को अब पानी से ही बड़ा ख़तरा पैदा हो गया है.
नवंबर 2019 में समंदर में ज्वार आने से लाखों क्यूबिक मीटर पानी, बाढ़ को रोकने के लिए बने बांध को लांघ कर शहर में घुस गया.
शहर के निचले हिस्सों से, लोगों को निकाल कर सुरक्षित जगहों पर ले जाना पड़ा. अब इस तरह की बाढ़ अक्सर आने लगी है, जिससे आम जनजीवन में बाधाएं आने लगी हैं.
खाड़ी के बीचों बीच, पानी में वेनिस शहर कैसे बसा और अब इसे बचाने के लिए क्या कोशिशें हो रही हैं, पूरी पड़ताल इस कहानी हैं. पढ़ने के लिए क्लिक करें.
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