शाहबाद डेयरी: सीसीटीवी पर मर्डर, कोई बचाने क्यों नहीं आया? ग्राउंड रिपोर्ट

प्रकाशित

दिलनवाज़ पाशा

बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

मंदिर और मज़ार आसपास
इमेज कैप्शन, शाहबाद डेयरी इलाक़े में घुसते ही मज़ार और मंदिर एक दूसरे से सटकर खड़े नज़र आते हैं

शाहबाद डेयरी इलाक़े में घुसते ही मज़ार और मंदिर सटकर खड़े नज़र आते हैं. हरे और भगवा झंडों के बीच यहां तिरंगा लहरा रहा है.

यहां से चंद क़दम की दूरी पर वो जगह है जहां 28 मई की रात 8 बजकर 45 मिनट (सीसीटीवी के मुताबिक) एक नाबालिग लड़की पर एक युवक बार-बार चाकू से वार करता है.

चश्मदीद उसे हमले करते हुए देखते हैं और बिना कोई हस्तक्षेप किए आगे बढ़ जाते हैं.

डेढ़ मिनट के इस वीडियो ने कुछ गंभीर सवाल खड़े किए हैं -

  • कोई इस बेरहमी से हमला कैसे कर सकता है?
  • लोग एक निहत्थी बेबस लड़की की जान बचाने आगे क्यों नहीं आए?
  • हमलावर के भाग जाने के बाद भी किसी ने लड़की की सुध क्यों नहीं ली?
  • पुलिस के आने तक उसे अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया?

इन्हीं सवालों का जवाब तलाशने के लिए घटना के दूसरे दिन बीबीसी की टीम शाहबाद डेयरी पहुंची.

घटनास्थल
इमेज कैप्शन, यही वो जगह है जहां पीड़िता पर बार-बार चाकू से वार किया गया

उस रात क्या हुआ था?

घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी
इमेज कैप्शन, आम आदमी पार्टी के स्थानीय विधायक का दावा है कि उनके बवाना विधानसभा क्षेत्र में एक हज़ार से अधिक सीसीटीवी कैमरा लगे हैं जो काम कर रहे हैं. घटना का वीडियो इसी सीसीटीवी में रिकॉर्ड हुआ है.
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घटनास्थल के आसपास के घरों में ताला लगा है. मीडियाकर्मियों की भीड़ है जो अलग-अलग एंगल से इस घटना को देखने की कोशिस कर रहे हैं.

आसपास की महिलाएं आ-जा रही हैं और घटना को लेकर अपनी राय मीडिया के साथ साझा कर रही हैं.

इनमें से कई बेहद आक्रोशित हैं और कुछ को लड़की की जान न बचाये जाने का अफ़सोस है.

बीबीसी ने घटना के वायरल सीसीटीवी फुटेज से दो मिनट पहले का एक और सीसीटीवी वीडियो देखा है जिसमें रात 8 बजकर 42 मिनट पर लड़की घटनास्थल की तरफ तेज़ क़दमों से आती दिखती है.

इसके ठीक दो मिनट बाद पहले से इंतज़ार कर रहा साहिल खान प्रतीक्षा (बदला हुआ नाम) पर बार-बार चाकू से हमला करता है.

पास ही खड़ा एक युवक एक बार हस्तक्षेप करने की कोशिश करता है और फिर भाग जाता है. इस दौरान कई युवा वहीं खड़े देखते रहते हैं, लोग गुज़रते हैं, ना कोई हस्तक्षेप करता है और ना मदद.

मौके से फरार अभियुक्त साहिल ख़ान को चौबीस घंटे के भीतर उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ़्तार कर लिया गया था.

प्रतीक्षा की एक दोस्त ने बीबीसी को बताया कि घटना से एक दिन पहले भी साहिल ने उसे जान से मारने की धमकी दी थी.

ये दोस्त दावा करती है कि प्रतीक्षा साहिल की धमकियों से परेशान थी और उसने मदद मांगी थी.

ये युवती कहती है, "मैंने और मेरे एक दोस्त ने प्रतीक्षा के साथ एक दिन पहले साहिल से मुलाक़ात की थी और उसे दूर रहने की हिदायत दी थी. जब हमने उसे समझाया तो उसने कुछ नहीं कहा, वो चुपचाप देखता रहा."

एक अन्य युवती इस घटनाक्रम की तस्दीक करते हुए बीबीसी से कहती है, "लड़की ने मेरे भाई से मदद मांगी थी तो उसने साहिल को समझाया था कि इससे दूर रहे. वो लड़की को जान से मारने की धमकी दे रहा था."

स्थानीय लोगों के मुताबिक़ घटना के बाद अफ़रा-तफ़री का माहौल हो गया था और भीड़ इकट्ठा हो गई थी.

लेकिन पुलिस के आने तक किसी ने लड़की को अस्पताल पहुंचाने की कोशिश नहीं की. कुछ लोगों का ये भी कहना था कि हमले के बाद लड़की ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था.

इंदिरावती

कौन थी मृतका?

झुग्गी
इमेज कैप्शन, पीड़िता का परिवार एक झुग्गी में रहता है जिसकी छत टीन की है.

शाहबाद डेयरी एक घनी आबादी वाला इलाक़ा है जिसके ई-ब्लॉक में कच्ची झुग्गियां हैं. पीड़िता का परिवार टिन की छत और एक कमरे वाली एक छोटी सी झुग्गी में रहता है.

ये दलित परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अयोध्या का है.

पिता राज मिस्त्री हैं और मज़दूरी करते हैं. मां पास ही की एक स्क्रेप फ़ैक्ट्री में दिहाड़ी पर मज़दूरी करती थीं.

एक छोटा भाई है जो पढ़ाई करता है.

प्रतीक्षा का इंस्टाग्राम अकाउंट एक हंसमुख और जिंदादिल लड़की की तस्वीर पेश करता है. वो गानों पर रील पोस्ट किया करती थीं और कई डांस वीडियो भी उन्होंने पोस्ट किए है.

प्रतीक्षा को जानने वाली आसपास की लड़कियां कहती हैं कि वो बहुत हंसमुख लड़की थी.

पिता कहते हैं, “मेरी बेटी बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थी और अपना खर्च ख़ुद उठाती थी. वो आगे चलकर वकील बनने का सपना देखती थी.”

जब उनसे साहिल ख़ान के बारे में पूछा गया तो वो कहते हैं, “हमें उस लड़के के बारे में कोई जानकारी नहीं है. अगर जानकारी होती तो हम अपनी बेटी की जान बचाने के लिए ज़रूर क़दम उठाते.”

पीड़िता की मां कमरे में बेसुध पड़ी हैं. राजनीतिक दलों के लोग उनसे आकर हाल पूछ रहे हैं लेकिन वो बोलने की स्थिति में नहीं हैं.

इस टीन के कमरे में ऊपर से सीधी धूप पड़ रही है और अंदर घुटन है. तेज़ आवाज़ में कूलर चल रहा है. लेकिन भीतर भीड़ इतनी ज़्यादा है कि कूलर कोई राहत पहुंचाने में नाकाम हैं. प्रतीक्षा की मां बार-बार बेहोश हो जाती हैं. घर के बाहर पत्रकारों की भीड़ है जो किसी भी तरह भीतर घुसकर कुछ सवाल इस परिवार से कर लेना चाहते हैं.

अभियुक्त साहिल कौन है?

साहिल ख़ान

इमेज स्रोत, Sahil Khan

इमेज कैप्शन, साहिल ख़ान के पड़ोसी कहते हैं कि वो दिखने में सीधा सादा लड़का लगता था और घटना के बारे में जानकर वो बहुत हैरान हैं.

साहिल का परिवार कुछ साल पहले तक शाहबाद डेयरी में मृतका के घर के आसपास ही रहता था.

लेकिन दो साल पहले वो रोहिणी के सेक्टर 35 में रहने चला गया था.

पुलिस के मुताबिक 20 साल का साहिल ख़ान एसी और फ्रिज की रिपेयरिंग का काम करता था.

साहिल के इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल पर लिखा है, “लव यू डॉर्क लाइफ़, दारू लवर.”

साहिल ने दोस्तों के साथ पार्टी करते हुए, हुक्का पीते हुए कई रील पोस्ट की हैं.

साहिल के बिलकुल पड़ोस में रहने वाली एक युवती आरुषि (बदला हुआ नाम) कहती हैं, “ये वीडियो देखकर हम सब बहुत हैरान हैं कि दिखने में इतना सीधा लगने वाला साहिल ऐसा वीभत्स हरकत कैसे कर सकता है.”

आरुषि कहती हैं, “वो पहले शाहबाद डेयरी इलाक़े में रहता था. यहां उसके बहुत दोस्त नहीं थे. कई बार वो दारू पीकर आता था, लेकिन हमने कभी उसे हंगामा करते हुए नहीं देखा.”

साहिल के पड़ोस में रहने वाला एक युवक कहता है, “उसके अधिकतर दोस्त वहीं थे. यहां के लड़कों से उसकी कोई बातचीत नहीं थी. यहां कभी उसकी लड़ाई नहीं हुई.”

वहीं साहिल ख़ान का परिवार जिस मकान में रहता है उसके मालिक रामफूल कहते हैं, “इस लड़के ने यहां कभी ऐसी हरकत नहीं की. लेकिन इस कांड के बाद हम इस परिवार को नहीं रखेंगे, जो ऐसी घटना कर सकता है, वो कुछ भी कर सकता है.”

साहिल ख़ान का परिवार इसी गली के एक मकान में किराये पर रहता है
इमेज कैप्शन, साहिल ख़ान का परिवार इसी गली के एक मकान में किराये पर रहता है

शाहबाद डेयरी इलाक़े में कैसा है माहौल?

शाहबाद डेयरी एक घनी आबादी का इलाक़ा है जहां हिंदू-मुसलमान घुलमिलकर रहते हैं. यहां अधिकतर गलियां खुदी हुई हैं, सीवर खुले हैं, बुनियादी सुविधाओं का अभाव है और पक्के मकाने के बीच कच्ची-झुग्गियां नज़र आती हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां ड्रग्स और नशे की आसान उपलब्धता, युवाओं की आपराधिक प्रवृत्ति और आयदिन होने वाले झगड़ों की वजह से लोग डर के साये में रहते हैं और कोई घटना होने पर हस्तक्षेप करने से बचते हैं.

सदाक़त

सदाक़त नाम की एक महिला कहती हैं, “जो पकड़ा गया है, उसे भी मौत की सज़ा मिलनी चाहिए. यहां कोई क़ानून नहीं है. पहले भी यहां मार कर फेंका जाता रहा है. कोई बाहर नहीं निकलता क्योंकि सभी को यही डर लगता है कि अगर हम बाहर निकलेंगे तो हमें ही भुगतना पड़ेगा.”

सदाक़त कहती हैं, “इस लड़की को कोई बचाने नहीं आया क्योंकि ये डर था कि कहीं हमें ही ना मार दें. यहां सब नशे में रहते हैं. मैं 1984 से यहां रह रही हूं, पहले ऐसा माहौल नहीं था, लेकिन अब बहुत ख़राब माहौल हो गया है. सब यहां नशा करते हैं, बात-बात पर लड़ते हैं. कोई बीच में बोलता है तो उसे ही मारने लगता है.”

शाहबाद डेयरी में हिंदू और मुसलमान दोनों रहते हैं, यहां के लोग इस घटना को धार्मिक नज़रिये से नहीं देख रहे हैं.

पूनम
इमेज कैप्शन, स्थानीय लोग इस घटना को धर्म के नज़रिये से नहीं देख रहे हैं.

पूनम यहीं अपने परिवार के साथ एक झुग्गी में रहती हैं और कुछ दिन पहले तक एक स्क्रैप फैक्ट्री में मज़दूरी करती थीं.

पूनम कहती हैं, “यहां गुंडागर्दी बहुत ज़्यादा है. नशेड़ी नशा करते हैं और मारपीट करते हैं, जिसकी वजह से लोग कुछ बोल नहीं पाते हैं. जो बीच में बचाने आता है, उसे ही पीट देते हैं, इसलिए ही यहां कोई किसी को बचाने अब आगे नहीं आता.”

पूनम कहती हैं, “यहां हिंदू मुसलमान सब मिलकर रहते हैं. ये मामला हिंदू-मुसलमान का नहीं है. अगर हिंदू ऐसी हत्या करता तो क्या उसे छोड़ दिया जाता. चाहें हिंदू ने मारा या मुसलमान ने मारा सज़ा बराबर मिलनी चाहिए और पुलिस को जल्द से जल्द सज़ा दिलवानी चाहती हैं.”

इस घटना के बाद से महिलाओं में डर का माहौल भी है.

यहां किराना की दुकान चलाने वाली एक महिला कहती हैं, “मेरी बेटी पढ़ने जाती है. आज कंप्यूटर क्लास के लिए गई तो डर लग रहा था. यहां का माहौल बहुत ख़राब है.”

खुलेआम नशा बिकने के आरोप

बीबीसी ने यहां जितने भी लोगों से बात की, सभी की एक ही शिकायत थी.

लोगों का कहना था कि यहां नशा बहुत आसानी से मिलता है और इसकी वजह से यहां का माहौल लगातार ख़राब हो रहा है.

घटनास्थल पर मौजूद एक स्थानीय महिला अंजू कहती हैं, “यहां सुधार की ज़रूरत है, यहां नशा बहुत है. ऐसा लगता है कि यहां के बच्चे पढ़ना-लिखना नहीं चाहते हैं, बस नशा करना चाहते हैं.”

एक अन्य महिला कहती हैं, “नशा छूट जाएगा यहां का तो सभी समस्या हल हो जाएगी. पुलिस को भी यहां आने से डर लगता है, जब पुलिस ही डरती है तो वो किसी को क्या सुरक्षा दे पाएगी. शाहबाद डेयरी में महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस चौकी खुलनी चाहिए.”

इस महिला की हां में हां मिलाते हुए एक अन्य महिला कहती है, “यहां नशा बेहद आसानी से मिल जाता है, लोग इसलिए विरोध नहीं करते क्योंकि सभी को डर होता है. यही नहीं यहां पार्कों में दिन दहाड़े जुआ खेला जाता है, कोई क्यों नहीं रोकता, पुलिस आकर रोकती क्यों नहीं है?”

लोग खुलकर बात करने से डर रहे थे.

एक महिला हिम्मत करके बोलते हुए कहती हैं, “मुझे भी बोलते हुए डर लग रहा है, मैं कांप रही हूं, लेकिन मुझे लग रहा है कि बोलना ज़रूरी है, अगर उस दिन किसी ने हिम्मत की होती, आगे बढ़कर हमलावर को रोका होता तो उस लड़की की जान बचाई जा सकती है.”

स्थानीय विधायक

स्थानीय विधायक जय भगवान उपकार मौजूदा हालात की ज़िम्मेदारी दिल्ली पुलिस पर डालते हुए कहते हैं, “यहां ड्रग्स माफ़िया बड़े स्तर पर सक्रिय है. दारू, चरस, अफ़ीम का अवैध व्यापार यहां बड़े पैमाने पर हो रहा है. युवा पीढ़ि नशे का शिकार हो रही है. मैंने बार-बार दिल्ली पुलिस को इस बारे में लिखा है, गृह मंत्रालय तक को लिखा है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है.”

जय भगवान कहते हैं, “अगर सीसीटीवी ना लगा होता तो ये घटना भी ख़बर नहीं बन पाती. दिल्ली पुलिस को लोगों की सुरक्षा के लिए क़दम उठाने चाहिए.”

एक स्थानीय निवासी ने बीबीसी को एक शिकायती पत्र दिखाया और आरोप लगाया, “मैंने नशाखोरी की शिकायत की तो पुलिस ने मुझे ही बुलाकर पूरा दिन थाने में रखा.”

बीबीसी ने स्थानीय लोगों और विधायक के ये आरोप दिल्ली पुलिस के सामने रखे हैं लेकिन कोई जवाब नहीं मिल सका है.

मीडिया से घिरा परिवार

मीडिया से घिरा परिवार
इमेज कैप्शन, पत्रकार बार-बार साहिल ख़ान के धर्म और कथित ‘लव जेहाद’ पर सवाल करते हैं. पीड़िता का परिवार कुछ नहीं बोलता

पीड़िता के घर के बाहर पत्रकारों की भीड़ हैं.

रिपोर्टर घर में दाख़िल होने के लिए पुलिस से धक्का मुक्की करते हैं.

परिवार से बात करने की ज़िद करते हैं. माहौल बिगड़ता देख पुलिस लड़की के माता-पिता को बाहर निकालने के लिए तैयार होती है.

अंतर-धार्मिक प्रेम संबंधों में हुई इस दर्दनाक हत्या के बाद मीडिया के कैमरे परिवार पर केंद्रित हैं.

पत्रकार बार-बार लड़के के धर्म और कथित ‘लव जेहाद’ बारे में सवाल पूछते हैं.

दर्जनों कैमरे से घिरे पीड़िता के पिता दोहराते हैं, “हम साहिल ख़ान को नहीं जानते, जानते तो ऐसा नहीं होने देते.”

फिर पत्रकार एक साथ कथित ‘लव जेहाद’ पर सवाल पूछते हैं.

पीड़िता के पिता बस इतना ही कहते हैं, “ये ऐसा मामला नहीं हैं.”

इसी बीच यहीं खड़ी एक महिला कहती है, “इस घटना के बहाने यहां इतने पत्रकार आए हैं, अगर ये यहां के मुद्दों पर बात करें तो शायद इस इलाक़े का कुछ भला हो जाए, महिलाओं को कुछ सुरक्षा मिल जाए. नशा बिकना बंद हो जाए.”

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