'न ख़ुशी न ग़म, बस...' इसराइल-अमेरिकी हमलों के बीच ईरान के लोगों ने बीबीसी को क्या बताया?

जंग शुरू होने के तीन दिन बाद सोमवार को तेहरान में उठते धुंए को देखते लोग
इमेज कैप्शन, जंग शुरू होने के तीन दिन बाद बीते सोमवार को तेहरान में उठते धुएं को देखते लोग
    • Author, कैरोलिन हॉली
    • पदनाम, विदेश मामलों की संवाददाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 8 मिनट

आज से दस दिन पहले जब ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत की ख़बर हामिद ने सुनी, तो वह बेहद ख़ुश हुए. वह जश्न मनाने के लिए अपनी पत्नी और बेटी को तेहरान स्थित अपने घर के बाहर सड़क पर ले गए.

अगले कुछ दिनों तक, जब अमेरिका और इसराइल के बम राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में इमारतों पर गिर रहे थे, तब यह परिवार घर की छत पर जाकर हवाई हमलों को देखता रहा.

हर बार जब सत्ता से जुड़े किसी ठिकाने पर हमला होता, तो वे खुशी ज़ाहिर करते.

हामिद ने ब्रिटेन में रह रहीं उनकी एक कज़न के ज़रिए मुझसे कहा, "ज़रा सोचिए, इस धरती पर कहीं और ऐसा मिलेगा, जहाँ लोग अपने ही देश पर बाहरी हमले से खुश हों."

"अब हमें उम्मीद है कि जल्द ही इस सरकार का पतन होगा. हम खुश हैं."

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हामिद (बदला हुआ नाम) ऐसे अकेले शख़्स नहीं हैं, जो ऐसा सोचते हैं.

बीबीसी पर्शियन सेवा के सहयोगियों के साथ मिलकर हमने ईरान के अंदर और बाहर रहने वाले लोगों से बात की.

बीता हफ़्ता उनके लिए, उनके देश के भविष्य के लिए और पूरे क्षेत्र के लिए बेहद अहम रहा है.

बीबीसी पर्शियन (फ़ारसी) बीबीसी न्यूज़ की ही एक सेवा है, जो फ़ारसी भाषा में संचालित होती है. बीबीसी फ़ारसी का इस्तेमाल दुनियाभर के 2 करोड़ 40 लाख लोग करते हैं.

ईरानी प्रशासन की ओर से बीबीसी फ़ारसी को ब्लॉक किए जाने और इसके प्रसारण में बाधा डालने के बावजूद इसे इस्तेमाल करने वालों में ज़्यादातर ईरान में रहने वाले लोग हैं.

डर, तनाव, उम्मीद और अनिश्चितता

सोमवार को तेहरान के इंक़लाब चौक पर लोगों ने नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई के समर्थन में आयोजित रैली में प्रदर्शनकारियों ने ईरानी झंडे लहराए और उनकी तस्वीरें पकड़ीं.
इमेज कैप्शन, सोमवार को तेहरान के इंक़लाब चौक पर लोगों ने नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई के समर्थन में आयोजित रैली में प्रदर्शनकारियों ने ईरानी झंडे लहराए और उनकी तस्वीरें पकड़ीं.
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ईरान पर लगातार बमबारी हो रही है और इंटरनेट पर कड़ी पाबंदियाँ लगी हुई हैं. ऐसे में नौ करोड़ की आबादी वाले इस विशाल देश में लोगों के मन में क्या चल रहा है ये समझ पाना आसान नहीं है.

तेहरान के लोगों को ऐसे संदेश मिले हैं, जिनमें चेतावनी दी गई है.

इन संदेशों में कहा गया है, "अगर आने वाले दिनों में आपका इंटरनेट कनेक्शन जारी रहता है, तो आपकी लाइन ब्लॉक कर दी जाएगी और आपको अदालत में पेश किया जाएगा."

शासन अब भी लोगों में डर पैदा करने की कोशिश कर रहा है और जो भी सरकार के ख़िलाफ़ बात करता है वो अपना नाम ज़ाहिर करने को तैयार नहीं है.

कुछ लोग अब भी हर हमले का जश्न मना रहे हैं, वहीं कुछ लोगों का डर बढ़ता जा रहा है. ये लोग इस युद्ध के मक़सद और इसके अंत को लेकर सवाल उठा रहे हैं.

अली ने हमसे कहा, "इस युद्ध का मक़सद ईरानी लोगों के लिए आज़ादी या लोकतंत्र लाना नहीं है."

"यह इसराइल, अमेरिका और क्षेत्र के अरब देशों के भू-राजनीतिक फ़ायदे के लिए है."

तेहरान में रहने वाले मोहम्मद ने कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता चाहते थे ताकि युद्ध को टाला जा सके.

उन्होंने कहा, "दिल से मैं हमेशा यही उम्मीद करता रहा कि कोई समझौता हो जाए."

मोहम्मद को लगा था कि ख़ामेनेई की मौत पर उन्हें खुशी होगी, लेकिन आख़िर में "उन्हें कुछ भी महसूस नहीं हुआ."

उन्होंने मेरे सहयोगी सोरौश पकज़ाद से कहा कि वह भविष्य को लेकर अनिश्चितता से भरे हुए हैं. हर जगह सरकार की चौकियाँ हैं और आसमान से बम गिर रहे हैं, इसलिए उन्हें डर लग रहा है.

वहीं कुछ अन्य ईरानियों ने कहा कि वे डर, तनाव और उम्मीद - तीनों महसूस कर रहे हैं.

एक महिला ने मुझसे कहा कि अगर मुझे यह समझना है कि वह और दूसरे ईरानी इस समय क्या महसूस कर रहे हैं, तो मुझे 40 साल ईरान में रहना होगा.

उन्होंने कहा, "जब सत्ता पर हमला होता है तो हम हँसते हैं और खुश होते हैं, लेकिन जब बच्चे मारे जाते हैं और हमारा इन्फ़्रास्ट्रक्चर तबाह होता है, तो हमें अपने देश के भविष्य की चिंता होने लगती है."

ईरान में कोई ओपिनियन पोल नहीं होते. लेकिन ज़्यादातर ईरानी अपनी मौजूदा सरकार से नफ़रत करते दिखाई देते हैं.

नए नेता के स्वागत में हुई रैली के दौरान सड़क पर पहरा देते ईरानी सैनिक
इमेज कैप्शन, बमबारी के बावजूद ईरान की ओर से मिसाइलें दागी जा रही हैं. इस तस्वीर में ईरानी सैनिक तेहरान की सड़कों पर गश्त लगा रहे हैं.

हालाँकि, देश में अब भी सरकार के बड़ी संख्या में कट्टर समर्थक हैं, लेकिन उसके विरोधियों में भी मतभेद हैं. कुछ लोग अमेरिका और इसराइल के हमलों का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग उन पर गहरा शक जताते हैं.

सईद ने हमसे कहा, "ट्रंप की सरकार में ऊपर से नीचे तक सब झूठ बोल रहे हैं. ईरान पर हमला करने की उनके पास कोई वजह नहीं थी. सिवाय इसके कि इसराइल ऐसा चाहता था."

ख़ुद ईरानी शासन के बयानों के अलावा, उसके समर्थकों की आवाज़ें हमें बहुत कम सुनाई दे रही हैं.

हम उन लोगों से भी नहीं सुन पाए हैं जिन्होंने सबसे ज़्यादा नुक़सान झेला है, जैसे- दक्षिणी शहर मीनाब के एक प्राथमिक स्कूल पर 28 फ़रवरी को हुए हमले में मारे गए बच्चों के माता-पिता.

यह अब तक युद्ध का सबसे बड़ा जानलेवा हमला माना जा रहा है.

लेकिन कई ईरानियों ने बीबीसी से कहा कि इस्लामी गणराज्य के 47 साल बाद वे इससे इतनी निराशा महसूस कर रहे हैं कि मौजूदा युद्ध ही उन्हें आज़ादी की आख़िरी उम्मीद लगता है.

लोगों की विरोधाभासी भावनाएं

ब्रिटेन में रहने वाले हामिद के कज़न अब निर्वासन में रह रहे लाखों ईरानियों में से एक हैं. उन्होंने पिछले शनिवार बीबीसी को व्हॉट्सऐप मैसेज में कई लोगों की विरोधाभासी भावनाएं बताईं.

"मुझे युद्ध से नफ़रत है. मैं नहीं चाहता कि कोई भी निर्दोष इंसान मारा जाए या घायल हो, चाहे वह किसी भी पक्ष का हो. लेकिन आज सुबह हमलों की ख़बर सुनकर मैं ख़ुशी से उछल पड़ा."

"मुझे पता है यह विरोधाभासी और पागलपन जैसा लगता है, लेकिन यही सच है. यह सोचकर कि क़ातिल हुकमरानों से आज़ादी का सपना शायद सच होने जा रहा है, मैं ख़ुशी से भर जाता हूँ."

हफ़्ते के अंत में हमने उनसे हामिद से फिर संपर्क कराने को कहा. लेकिन उनकी कज़न उनसे संपर्क नहीं कर सकीं.

उन्होंने कहा, "प्लीज़ मुझे जज मत करिए. लेकिन मुझे लगता है कि हमले जारी रहने चाहिए. उन्हें यह काम पूरा करना होगा."

हामिद ने अपनी कज़न से कहा था कि ज़्यादातर हवाई हमले "बुरे" लोगों पर सटीक निशाना लगाकर किए जा रहे हैं.

हामिद ने आगे बताया कि 'हमें आम नागरिकों की बढ़ती मौतों की ख़बरें भी मिल रही हैं, जिनमें कई बच्चे भी शामिल हैं. ये सब ऐसे देश में हो रहा है, जहाँ न तो बम शेल्टर हैं और न चेतावनी देने वाले सायरन.'

युद्ध के एक हफ़्ते में बदले विचार

6 मार्च, 2026 को ईरान के तेहरान में हुए विस्फोटों के बाद इमारतों के ऊपर से धुआं उठता हुआ दिखाई दे रहा है.
इमेज कैप्शन, 6 मार्च, 2026 को ईरान के तेहरान में हुए विस्फोटों के बाद इमारतों के ऊपर से धुआं उठता हुआ दिखाई दे रहा है.

अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी (एचआरएएनए) के मुताबिक़, अब तक हज़ार से ज़्यादा आम नागरिक मारे जा चुके हैं, जिनमें लगभग 200 बच्चे शामिल हैं.

जब यह युद्ध शुरू हुआ, तब एचआरएएनए जनवरी में देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के ख़िलाफ़ सरकार की कार्रवाई में मारे गए हज़ारों लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रहा था.

इन प्रदर्शनों के दौरान सरकारी सुरक्षा बलों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाई थीं. ईरान के लोग अब भी इस भयानक ख़ूनख़राबे से सदमे में हैं.

इस्फ़हान के रहने वाले समन (बदला हुआ नाम) ऐसे छह लोगों को व्यक्तिगत तौर पर जानते हैं, जिन्हें उस समय सेंट्रल सिटी की सड़कों पर गोली मार दी गई थी. तेहरान में अलग-अलग हवाई हमलों में अब उनके दो रिश्तेदार भी मारे जा चुके हैं.

उन्होंने कुछ रोज़ पहले बीबीसी फ़ारसी के सोरौश पकज़ाद को संदेश भेजा और कहा कि इस्फ़हान की स्थिति "वाक़ई डरावनी" है.

उन्होंने कहा कि वह सदमे और ग़ुस्से में हैं. उन्होंने बताया, "मैंने अपने सबसे बुरे ख़्वाबों में भी नहीं सोचा था कि हम इस तरह युद्ध की चपेट में आ जाएँगे."

मेरी सहयोगी ग़ोंचेह हबीबीआज़ाद ईरान के अंदर से लोगों की राय जानने की कोशिश कर रही हैं. वह कहती हैं कि युद्ध जारी रहने के कारण कुछ लोगों के विचार बदल गए हैं.

तेहरान की बीस साल की एक युवती ने कहा कि सुप्रीम लीडर को निशाना बनाए जाने पर वह खुशी से झूम उठी थीं.

उसके छह दिन बाद उन्होंने ग़ोंचेह से कहा, "अब मैं न खुश हूँ, न दुखी. बस थक गई हूँ."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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