इसराइल ग़ज़ा युद्ध: युद्धविराम की आहट के बीच इसराइल चुप, हमास ने क्या कहा?

हमास के नेता इस्माइल हानियेह
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हमास के नेता इस्माइल हानियेह ने कहा है कि उनका गुट इसराइल के साथ संघर्ष विराम पर समझौते के लिए तैयार हैं.

इसराइल और हमास के बीच छह हफ़्ते से चली आ रही लड़ाई के बाद इस्माइल हानियेह के इस बयान को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है.

इस सिलसिले में एक बयान जारी किया गया है. बयान में कहा गया है कि हमास ने इस विवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे क़तर को अपना जवाब भेज दिया है.

युद्ध विराम की संभावनाओं पर इसराइल की ओर से फिलहाल अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के हवाले से अपनी रिपोर्ट में ये ज़रूर कहा है कि "उम्मीद है कि जल्द ही अच्छी ख़बर मिलेगी."

माना जा रहा है कि इस समझौते के तहत युद्ध रोकने के लिए और कुछ फलस्तीनी क़ैदियों की रिहाई के बदले हमास इसराइल से बंधक बनाकर ग़ज़ा लाए गए कुछ लोगों को रिहा कर सकता है.

इंटरनेशनल रेड क्रॉस की प्रेसीडेंट
इमेज कैप्शन, इंटरनेशनल रेड क्रॉस की प्रेसीडेंट मिरयाना स्पोलयारिक एगर

हमास के नेता इस्माइल हानियेह क़तर में रहते हैं. इंटरनेशनल रेड क्रॉस की प्रेसीडेंट मिरयाना स्पोलयारिक एगर भी इस समय क़तर के दौरे पर हैं.

दोनों की क़तर में मौजूदगी की वजह से इन अफ़वाहों को बल मिला है कि हमास और इसराइल समझौते के क़रीब हैं.

इस बीच क़तर की ओर से इस वार्ता में शामिल एक मध्यस्थ ने कहा है कि ग़ज़ा में बंधक बनाकर रखे गए लोगों की रिहाई के लिए बातचीत अपने आख़िरी पड़ाव पर है.

क़तर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल-अंसारी ने कहा, "इस युद्ध के शुरू होने के बाद से हम पहली बार समझौते के इतना क़रीब पहुंचे हैं."

उन्होंने ये भी कहा कि बातचीत 'निर्णायक और अंतिम चरण' में है.

इसराइल के पीएम ने 'जल्द अच्छी ख़बर' की उम्मीद जताई

इसराइल के प्रधानमंत्री
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इस बीच समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इसराइल के प्रधानमंत्री के हवाले से ये कहा है कि ग़ज़ा पट्टी से बंधकों की वापसी की कोशिशों में प्रगति हासिल हुई है.

बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि जल्द ही अच्छी ख़बर मिलेगी."

इसराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा है कि नेतन्याहू बंधकों की रिहाई से संबंधित घटनाक्रम को देखते हुए अपनी वॉर कैबिनेट (युद्ध मंत्रिपरिषद) की बैठक करने जा रहे हैं. इस मीटिंग के ख़त्म होने के बाद स्थानीय समयानुसार शाम के छह बजे नेतन्याहू अपनी सुरक्षा परिषद और कैबिनेट के साथ भी बैठक करेंगे.

किसी भी समझौते को मंज़ूर करने के लिए उसे नेतन्याहू द्वारा नियुक्त तीन समूहों की अनुमति ज़रूरी होगी. नेतन्याहू इन ग्रुप्त के साथ आज रात मीटिंग करने जा रहे हैं.

अमेरिका ने क्या कहा

व्हाइट हाउस के नेशनल सिक्योरिटी स्पोक्सपर्सन जॉन किर्बी
इमेज कैप्शन, व्हाइट हाउस के नेशनल सिक्योरिटी स्पोक्सपर्सन जॉन किर्बी

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन पहले ही इस बात के संकेत दे चुके हैं कि इसराइल और हमास समझौते के करीब पहुंच चुके हैं.

व्हाइट हाउस के नेशनल सिक्योरिटी स्पोक्सपर्सन जॉन किर्बी ने बीती रात संवाददाताओं से इस बारे में पूछे गए सवालों के जवाब दिए.

जॉन किर्बी ने कहा, "बंधकों की रिहाई के सिलसिले में चल रही बातचीत पर अपडेट देने के लिए मेरे पास कोई जानकारी नहीं है. हम इस मुद्दे पर बातचीत की कोशिश कर रहे हैं. जैसा कि आपने नेशनल सिक्योरिटी एडवाइज़र को कल ये कहते सुना था कि हमारा मानना है- हम समझौते के इतने करीब पहले कभी नहीं पहुंचे थे."

उन्होंने कहा, "इसलिए हम आशान्वित हैं. लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाक़ी है और जब तक सबकुछ हो नहीं जाता तब तक कुछ नहीं होता है. इसलिए हम इस मुद्दे पर काम जारी रखेंगे."

'हमास चाहता है इसराइल हवाई हमले रोके'

हमास के नेता याह्या सिनवार
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इसराइली मीडिया की कुछ अपुष्ट रिपोर्टों में कहा गया है कि हमास संघर्ष विराम के दौरान इसराइल से ग़ज़ा के ऊपर हवाई हमले रोकने की मांग कर रहा है.

न्यूज़ वेबसाइट 'वाल्ला' के मुताबिक़, ग़ज़ा में हमास के नेता याह्या सिनवार पूरे ग़ज़ा के आसमान के ऊपर किसी किस्म की हवाई गतिविधि नहीं चाहते हैं.

जबकि न्यूज़ वेबसाइट 'वाईनेट' की रिपोर्ट कहती है कि हमास केवल उत्तरी ग़ज़ा के ऊपर दिन में छह घंटों के लिए हवाई अभियान रोकने की मांग कर रहा है.

सात अक्टूबर के हमास के बाद इसराइल की जवाबी कार्रवाई का मुख्य फ़ोकस हवाई हमलों पर रहा है. इसके तहत ग़ज़ा के ऊपर हज़ारों बार उसके विमानों ने हमले के लिए उड़ान भरी हैं.

हमास के हमले में 1200 लोग मारे गए थे. हमास ने इस हमले में लगभग 240 लोगों को अगवा कर लिया था. उधर, ग़ज़ा में हमास के नियंत्रण में काम करने वाली हेल्थ मिनिस्ट्री का कहना है कि इसराइल के हवाई हमले में 13,300 लोग मारे जा चुके हैं जिनमें 5000 से अधिक बच्चे हैं.

वीडियो कैप्शन, इसराइल हमास संघर्ष में इसराइल सफ़ेद पूंछ वाली चील की मदद क्यों ले रहा है?

इसराइल के हवाई अभियान में लड़ाकू विमानों के अलावा बड़ी संख्या में ड्रोन्स भी इस्तेमाल किए गए हैं जिनका इस्तेमाल हमलों से लेकर सर्विलांस तक में किया गया है.

इसमें टारगेट की पहचान करने और ग्राउंड पर तैनात इसराइली मिलिट्री के सामने मौजूद ख़तरों का पता लगाने का काम भी शामिल था.

अगर हमास की मांग पर अमल करते हुए इसराइल अपना हवाई अभियान रोकता है तो इससे उसकी खुफिया जानकारी जुटाने की क्षमता प्रभावित होगी.

ऐसा करने से बंधकों की रिहाई की प्रक्रिया पर नज़र रखने का काम भी प्रभावित हो सकता है.

अगर ये रिपोर्टें सही हैं तो हवाई अभियान पूरी तरह से रोकना इसराइल के लिए समझौते की दिशा में बड़ा रोड़ा बन सकता है. दोनों पक्ष अपने वादों पर कितने खरे उतरते हैं, इसकी पुष्टि करना भी मुश्किल काम होगा.

बंधकों की रिहाई में रेड क्रॉस की क्या भूमिका है?

वीडियो कैप्शन, COVER STORY: बंधकों की रिहाई के सवाल पर क्या बोले हमास नेता?

जिनेवा में मौजूद बीबीसी संवाददाता इमोजन फॉक्स का कहना है कि संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में बंधक बनाए गए लोगों की रिहाई कराने में 'इंटरनेशनल कमिटी ऑफ़ द रेड क्रॉस' (आईसीआरसी) के योगदान का पुराना इतिहास रहा है.

जिनेवा कन्वेंशंस के तहत रेड क्रॉस को ये अधिकार हासिल है कि वो युद्ध बंदियों से जाकर मिल सकता है, उनकी देखभाल के लिए उठाए जा रहे कदमों की जांच कर सकता है और क़ैदियों और उनके परिजनों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान करवाने में मदद कर सकता है.

आज के माहौल में रेड क्रॉस की भूमिका का विस्तार हिरासत में लिए गए लोगों और बंधकों तक है.

आईसीआरसी हमास के संपर्क में है और उसने इसराइल से बंधक बनाए गए लोगों के बीच जाने की बार-बार इजाजत मांगी है.

वीडियो कैप्शन, हमास द्वारा बंधक बनाई गई बहनों की कहानी

हालांकि रेड क्रॉस ऐसी रिहाई के लिए वार्ताकार की भूमिका नहीं निभाता है. ये काम संबंधित पक्षों को ही करना पड़ता है.

जब एक बार समझौता हो जाता है तो आईसीआरसी का काम शुरू होता है. वो रिहा किए गए बंधकों को सुरक्षित उनके घर तक पहुंचाता है, उनके परिजनों से मिलवाता है.

पिछले साल यमनी युद्ध बंदियों की रिहाई के समय ऐसा ही किया गया था. चार इसराइली क़ैदियों की रिहाई के मामले में भी यही हुआ था.

फिलहाल ये चर्चा हो रही है कि बड़ी संख्या में लोग रिहा किए जा सकते हैं जिनमें छोटे बच्चे भी होंगे. संघर्ष प्रभावित ग़ज़ा के अलग-अलग इलाकों से बंधकों को लाने-ले जाने की चुनौती आ सकती है.

माना जा रहा है कि आईसीआरसी की प्रेसीडेंट इन्हीं बारीकियों पर हमास नेताओं से बात करने के लिए सोमवार को क़तर गए हैं.

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