मुज़फ़्फ़राबाद की ओर लॉन्ग मार्च के एलान के बाद रावलाकोट को सील किया गया

    • Author, शहज़ाद मलिक
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में प्रतिबंधित जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) की ओर से मुज़फ़्फ़राबाद की ओर लॉन्ग मार्च के एलान के बाद हालात तनावपूर्ण हैं.

अधिकारियों के मुताबिक़ मार्च से पहले मंगलवार को हुई झड़पों में दो सुरक्षाकर्मियों समेत 10 लोगों की मौत हुई है.

संगठन ने बुधवार दोपहर रावलाकोट से मुज़फ़्फ़राबाद के लिए मार्च शुरू करने का एलान किया था. अधिकारियों के मुताबिक़, इसे देखते हुए रेंजर्स, पुलिस और एफ़सी के चार हज़ार जवान पहले ही पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर पहुंच चुके हैं.

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सरदार वहीद ख़ान का कहना है कि अवामी एक्शन कमेटी के लॉन्ग मार्च को रावलाकोट से गुज़रने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने बताया कि शहर को सील कर दिया गया है और रेंजर्स समेत क़ानून लागू करने वाली एजेंसियों के जवान वहां तैनात हैं.

वहीद ख़ान के मुताबिक़ प्रदर्शनकारी सिर्फ़ पगडंडियों के रास्ते ही मुज़फ़्फ़राबाद जा सकते हैं. इसके अलावा उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है.

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि इस समय रावलाकोट के हर एक इलाक़े में प्रदर्शनकारियों की संख्या एक हज़ार से 1,500 के बीच है.

दूसरी ओर अवामी एक्शन कमेटी की कोर कमेटी के सदस्य आबिद शाहीन ने बीबीसी से बातचीत में दावा किया कि अब तक हर एक इलाक़े में चल रहे धरने में क़रीब 40 हज़ार लोग पहुंच चुके हैं. उनका कहना था कि धरनास्थल पर लगातार और लोग पहुंच रहे हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं.

अधिकारियों ने मीडिया प्रतिनिधियों के रावलाकोट में प्रवेश पर अनौपचारिक रोक लगा रखी है. इसकी वजह से शहर के हालात और धरने में शामिल लोगों की संख्या के बारे में किए जा रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि संभव नहीं है.

आबिद शाहीन का कहना था कि लॉन्ग मार्च दोपहर दो से तीन बजे के बीच शुरू होगा और रावलाकोट शहर से होकर ही मुज़फ़्फ़राबाद की ओर जाएगा.

जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी जिन मांगों को लेकर लॉन्ग मार्च कर रही है, उनमें शरणार्थियों के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों और सत्ताधारी वर्ग को मिलने वाली सुविधाओं को ख़त्म करना शामिल है. इसके अलावा मंत्रियों और राजनीतिक नियुक्तियों को घटाने और सरकारी संसाधनों का किफ़ायती इस्तेमाल जैसी मांगें भी शामिल हैं.

मुज़फ़्फ़राबाद में पुलिस, रेंजर्स और एफ़सी के जवान गश्त कर रहे हैं. शहर में दुकानें खुली हैं, लेकिन लोअर और सेंट्रल प्लेट इलाके में ज़्यादातर दुकानें बंद हैं. बैंक और पेट्रोल पंप भी खुले हैं, हालांकि बैंकों के एटीएम के बाहर पैसे निकालने वालों की अच्छी-खासी भीड़ देखी जा रही है.

मंगलवार को 10 और मौतें

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सरदार वहीद ख़ान ने बीबीसी को बताया कि मंगलवार को रावलाकोट और सुधनोती में हुई दो अलग-अलग घटनाओं में मारे गए लोगों में आठ नागरिकों के अलावा रेंजर्स और पुलिस का एक-एक जवान भी शामिल है.

एक स्थानीय अधिकारी ने बीबीसी उर्दू को बताया कि क़रीब 450 रेंजर्स जवानों का एक काफ़िला रावलाकोट की ओर जा रहा था तभी बैठक बलोच के पास प्रतिबंधित जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के कार्यकर्ताओं ने काफिले का रास्ता रोक लिया और उन पर पथराव शुरू कर दिया.

उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने काफ़िले पर गोलीबारी भी की. जवाबी गोलीबारी में सात प्रदर्शनकारी मारे गए, जबकि एक पुलिसकर्मी की भी मौत हुई.

ज़िला प्रशासन के अधिकारी के मुताबिक़ प्रदर्शनकारी इस घटना में मारे गए लोगों के शव अपने साथ ले गए. गोलीबारी में कई अन्य लोग भी घायल हुए हैं.

प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच दूसरी झड़प रावलाकोट में हुई. अधिकारियों के अनुसार जब क़ानून लागू करने वाली एजेंसियों ने रास्ता खुलवाने के लिए कार्रवाई की, तो प्रदर्शनकारियों ने गोलीबारी की. इसमें रेंजर्स का एक जवान मारा गया, जबकि जवाबी गोलीबारी में प्रतिबंधित संगठन का एक कार्यकर्ता भी मारा गया.

इससे पहले पुलिस ने कहा था कि रावलाकोट में प्रतिबंधित जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के हथियारबंद लोगों की ओर से हुई दो अलग-अलग घटनाओं में रेंजर्स और पुलिस का एक-एक जवान मारा गया.

पुलिस ने मृतकों की पहचान रेंजर्स के नायक इम्तियाज़ अली और पुलिस कांस्टेबल आकिब के रूप में की थी.

पुलिस ने यह भी दावा किया कि "पिछले सप्ताह जनसमर्थन हासिल करने में नाकाम रहने के बाद प्रतिबंधित संगठन ने सोमवार सुबह न्यू बस टर्मिनल के पास अंधाधुंध गोलीबारी की, ताकि इसका आरोप सुरक्षा बलों पर लगाया जा सके."

वहीं पुलिस की एक अन्य प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार बैठक बलोच इलाके में "हथियारबंद समूहों की बिना उकसावे की गोलीबारी" में एक पुलिस कॉन्स्टेबल की मौत हुई, जबकि आठ पुलिसकर्मी, एफ़सी का एक जवान और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के दो कर्मचारी घायल हुए हैं.

बीबीसी उर्दू इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सका है. हालांकि प्रतिबंधित जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी की ओर से इस मामले पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सोशल मीडिया पर संगठन से जुड़े एक अकाउंट ने रेंजर्स जवान की हत्या के आरोप से इनकार किया है.

सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कमेटी ने कहा, "एक वीडियो सोशल मीडिया और पाकिस्तानी मीडिया पर चल रही है, जिसमें कुछ लोगों के हाथों में बंदूकें दिखाई दे रही हैं. हम सभी उसी इलाके से हैं. ये लोग जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं."

"अगर हमें बंदूक उठानी होती, तो आज तक अपने निहत्थे भाइयों की इतनी लाशें न उठानी पड़तीं."

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़, मंगलवार की घटनाओं के बाद पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में कई सप्ताह से जारी प्रदर्शनों और सरकारी कार्रवाई में अब तक पांच पुलिसकर्मियों समेत कुल 28 लोगों की मौत हो चुकी है.

लॉन्ग मार्च क्यों हो रहा है और एक्शन कमेटी की क्या मांगें हैं?

एक्शन कमेटी का कहना है कि इन विधानसभा सीटों और विकास फ़ंड्स को इलाक़े के बाहर भेजने से स्थानीय संसाधनों पर बोझ पड़ता है. इसके अलावा सरकार के साथ हुए समझौतों के तहत कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ दर्ज मुक़दमे ख़त्म करने, चरित्र प्रमाणपत्र जारी करने में आ रही रुकावटें दूर करने और पाकिस्तान रेंजर्स की तैनाती का विरोध भी उनकी मांगों में शामिल है.

कमेटी ने मुफ्त और बेहतर शिक्षा तथा इलाज, अस्पतालों में डॉक्टरों, स्टाफ़, दवाओं और जांच सुविधाओं की उपलब्धता, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की स्थापना, सरकारी नौकरियों में कुछ कोटा व्यवस्था ख़त्म करने, आटा और गेहूं की गुणवत्ता सुधारने, ग्रिड स्टेशनों और प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय अधिकार, मंगला बांध से जुड़े मुआवज़े का भुगतान, पर्यावरण के अनुकूल जलविद्युत परियोजनाएं, भ्रष्टाचार और सिफ़ारिश संस्कृति ख़त्म करने तथा प्रशासनिक सुधारों की भी मांग की है.

38 सूत्रीय मांगपत्र में युवाओं के लिए बिना ब्याज के कर्ज़, रोज़गार या बेरोज़गारी भत्ता, टैक्स में राहत, विकलांग लोगों के लिए नौकरी में आरक्षण, न्यायिक और स्थानीय निकाय सुधार, छात्र संघ चुनाव, एडहॉक नियुक्तियों का अंत, व्यापारियों की सुरक्षा, न्यूनतम 50 हज़ार रुपये मासिक वेतन और सफ़ाई कर्मचारियों को ज़मीन आवंटित करने जैसी मांगें भी शामिल हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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