शार्ली एब्डो: पेरिस में 2015 में हुए चरमपंथी हमले में 14 लोग दोषी क़रार

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पेरिस की एक अदालत ने साल 2015 में पेरिस स्थित फ़्रांस की व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्डो के दफ़्तर पर हुए चरमपंथी हमले में शामिल लोगों की मदद करने के आरोप में 14 लोगों को दोषी क़रार दिया है.
जनवरी 2015 में हुए इस चरमपंथी हमले में एक महिला पुलिसकर्मी समेत 17 लोग मारे गए थे.
सात जनवरी, 2015 को शार्ली एब्डे के दफ़्तर पर हुए हमले में 12 लोग मारे गए थे. इसके एक दिन बाद एक महिला पुलिस अफ़सर को गोली मार दी गई थी और दो दिनों बाद एक सुपरमार्केट में हुए हमले में चार लोग मारे गए थे.
बुधवार को 11 अभियुक्त सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद थे जबकि तीन लोगों का ट्रायल उनकी अनुपस्थिति में हुआ.
एक अभियुक्त हयात बाओमुद्दीन बुधवार को अदालत में उपस्थित नहीं थीं. सुपरमार्केट पर हमला करने वाले आमेदी काउलीबाली की पार्टनर हयात बाओमुद्दीन हमले से ठीक एक हफ़्ते पहले सीरिया भाग गई थीं.
अदालत ने उन्हें आतंकवाद की आर्थिक मदद करने और आपराधिक आतंकवादी नेटवर्क का हिस्सा पाते हुए 30 साल क़ैद की सज़ा सुनाई है.
अदालत में मौजूद इस हमले के प्रमुख अभियुक्त अली रज़ा पोलाट को भी आतंकवादी अपराध में शामिल होने का दोषी पाया गया और उन्हें भी 30 साल की सज़ा सुनाई गई.

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सभी 14 अभियुक्तों को अलग-अलग अपराधों का दोषी पाया गया.
11 अभियुक्तों में से छह पर से आतंकवाद का चार्ज हटा दिया गया था क्योंकि अदालत ने उन्हें उससे छोटे अपराध का दोषी पाया था.
साल 2015 में सात से नौ जनवरी के बीच हमला करने वाले तीन हमलावरों को पुलिस ने बाद में मार दिया था. लेकिन उनके साथियों पर इसी साल सितंबर में मुक़दमे की सुनवाई शुरू हुई थी.
कोविड के कारण मुक़दमे की सुनवाई में देरी हुई और मुक़दमे की सुनवाई ऐसे समय में हुई जब फ़्रांस में एक बार फिर चरमपंथी हमले हुए हैं और हज़रत मोहम्मद के कार्टूनों को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है.
2015 में क्या हुआ था

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सात जनवरी को सैड और चेरिफ़ कोची नाम के भाइयों ने शार्ली एब्डो के दफ़्तर में घुसकर फ़ायरिंग की थी और एडिटर स्टीफ़ेन चार्बोनियर, चार कार्टूनिस्टों, दो स्तंभकारों, एक कॉपी एडिटर, एक केयरटेकर और एक मेहमान की हत्या कर दी थी. हमले में एडिटर के अंगरक्षक और एक पुलिस अधिकारी भी मारे गए थे.
पुलिस ने जब इन भाइयों की तलाश शुरू की तो एक बंधक संकट पैदा हो गया. इनके एक सहयोगी ने एक महिला पुलिसकर्मी की हत्या कर दी और एक यहूदी सुपरमार्केट में कई लोगों को बंधक बना लिया.
इस शख़्स ने नौ जनवरी को चार यहूदियों की हत्या कर दी. बाद में उसकी भी पुलिस की गोली से मौत हो गई. मरने से पहले रिकॉर्ड एक वीडियो में इस शख़्स ने कहा था कि इन हमलों को इस्लामिक स्टेट समूह के नाम पर अंजाम दिया गया है.
शार्ली एब्डो के दफ़्तर पर हमला करने वाले भाइयों की भी पुलिस की गोली से मौत हो गई थी.
शार्ली एब्डो को निशाना क्यों बनाया गया

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शार्ली एब्डो सत्ता विरोधी व्यंग्य छापती है. अति दक्षिणपंथी ईसाई, यहूदी और इस्लामिक मान्यताओं पर प्रहार करने को लेकर यह पत्रिका लंबे समय से विवादों में रही है.
मगर पैग़ंबर मोहम्मद पर कार्टून बनाने के बाद से इसकी टीम को लगातार धमकियां मिल रही थीं और 2011 में इसके दफ़्तरों पर पेट्रोल बम से हमला किया गया था.
पत्रिका के संपादक ने अपने कार्टूनों को 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' के तहत सही बताया था. 2012 में उन्होंने समाचार एजेंसी एपी से कहा था, "हमारी ड्रॉइंग्स पर अगर मुसलमानों को हंसी नहीं आती तो मैं उन्हें दोष नहीं देता. मैं फ़्रांसीसी क़ानून के राज में रहता हूं, मैं क़ुरान के क़ानून के तहत नहीं रहता."
2015 के हमलों के बाद हज़ारों लोग शार्ली एब्डो के समर्थन में सड़कों पर उतर आए थे और #JeSuisCharlie (मैं चार्ली हूं) हैशटैग और यह नारा पूरी दुनिया में छा गया था.
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